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जम्मू के सिद्दड़ा मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल।
– फोटो : अमर उजाला
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शहर से सटे सिद्दड़ा इलाके में चार आतंकियों को ढेर किए जाने के बाद कुछ और दहशतगर्दों की मौजूदगी की भी आशंका बनी हुई है। मारे गए आतंकियों के रूट का अभी तक पुख्ता तौर पर पता नहीं चल पाया है। ऐसे में आतंकी कहां से आए और उनकी संख्या कितनी थी, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि सीमा पार से चार ही आतंकी इस तरफ आए थे। कई बार आतंकी अलग-अलग ग्रुप में बंटकर भी अपने ठिकाने तक पहुंचने या फिर तय टारगेट को अंजाम देने की कोशिश करते हैं।
प्रथम दृष्टया इस मामले में चारों आतंकियों का मकसद जम्मू को दहलाना नहीं था, क्योंकि उन्होंने कश्मीर घाटी की ओर ही जाना था। आतंकियों की मूवमेंट का इनपुट होने के बावजूद इस पहलू को भी जांचने की कोशिश की जा रही है कि कहीं आतंकियों की संख्या चार से अधिक तो नहीं थी।
घुसपैठ की सुई सांबा या कठुआ की तरफ इसलिए भी घूम रही है क्योंकि दोनों ही जिलों में घुसपैठ के पारंपरिक रूट हैं। तारबंदी पर सख्ती के बाद सुरंग से भी आतंकी घुसपैठ की वारदातें हो चुकी हैं। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां तमाम संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट पर हैं।
तालिबान के हाथ चढ़े, अब इस तरफ आ रहे अमेरिकी हथियार
पूर्व डीजीपी शेशपाल वैद ने ट्वीट में कहा, एक बार फिर आतंकियों से अमेरिकी राइफल एम-4 बरामद हुई है। सिद्दड़ा में मारे गए चार आतंकियों से मिली यह वही राइफल है, जिसे अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती थी और अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी पर यह हथियार आतंकियों के जरिये अब इस तरफ आ रहे हैं। इस ट्रेंड के लिए अमेरिका का जो बाइडन प्रशासन जिम्मेदार है। ब्यूरो
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