गोरखपुर: दिन ढलते ही घर से निकलने में डरते थे, एडीजी की पहल पर अब कम हुई दहशत

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People troubled by raw liquor in Moosabar village of Campierganj police increased vigilance

मूसाबार गांव में कच्ची शराब के खिलाफ आपस में बात करतीं बर्फी, गुजराती और गुलाबी देवी।
– फोटो : अमर उजाला।

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गोरखपुर जिले में कैंपियरगंज थाने की करमैनी चौकी से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर बसा है मूसाबार गांव। कच्ची शराब के धंधे के लिए बीते दिनों सुर्खियों में रहे इस गांव में पहले लोग दिन ढलने के बाद घर से निकलने से डरते थे कि कहीं किसी शराबी से आमना-सामना न हो जाए। एडीजी की पहल पर पुलिस सक्रिय हुई तो हालात थोड़े सुधरे हैं। अब पुलिस गांव में कच्ची शराब के धंधेबाजों की निगरानी कर रही है।

बृहस्पतिवार को दोपहर के दो बजे गांव में चारों तरफ सन्नाटा नजर आया। एक दुकान पर चार-पांच लोग बैठे मिले। पास में इतनी ही महिलाएं आपस में बात कर रही हैं। सबकी जुबां पर एक ही चर्चा है, वह है कच्ची शराब। रामभवन कहते हैं कि गांव की पहचान ही कच्ची शराब हो गई है। बहन-बेटी निकलें कैसे, यह बड़ा सवाल है। इसी दौरान सूर्य नारायण कहते हैं कि अब अफसरों के हस्तक्षेप के बाद हालात सुधरने की उम्मीद है। पुलिस तो आने लगी है, लेकिन चिंता यह भी सता रही है कि कितने दिन। आखिर यह बंद कैसे होगा।

गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। शराब बनाने वाले घर से लापता हो गए हैं। घर में महिलाएं ही बची हैं। वे भी खुद को पुलिस से बचाने में जुटी हैं। गांव की बर्फी कहती हैं कि बाबू…ये हालात पुराने नहीं हैं। पहले गांव में इस काम को कुछ लोग ही करते थे। उनका घर एक किनारे है। अब तो कई लोग शराब बनाने लगे हैं। शाम ढलते ही घर से निकलने में डर लगता है।

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