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हाटी विकास मंच के प्रतिनिधि।
– फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून लागू नहीं होने पर हाटी बिफर गए हैं। शुक्रवार को हाटी विकास मंच ने हिमाचल सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि केंद्रीय कानून जल्द लागू नहीं किया गया तो उन्हें दोबारा जनआंदोलन शुरू करना पड़ेगा। मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार शर्मा से मुलाकात कर कानून के लागू होने में हो रही देरी पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि दो महीनों से अधिक समय तक मामला लटकाना कानून का अपमान है। इस देरी के कारण एसटी प्रमाणपत्र जारी न होने से नौकरियों और छात्रवृत्ति में नुकसान हो रहा है। हाटी विकास मंच के अध्यक्ष प्रदीप सिंगटा, मुख्य प्रवक्ता डॉ. रमेश सिंगटा, सलाहकार मदन तोमर ने शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और जनजातीय विकास विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा और संयुक्त सचिव जनजातीय विकास विभाग विक्रम नेगी से मुलाकात की।
इस दौरान ज्ञापन सौंपते हुए हाटी को एसटी का दर्जा दिलाने के लिए अधिकारियों के योगदान को सराहा गया और क्रियान्वयन करने में देरी होने पर रोष भी जताया गया। हाटी विकास मंच ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तत्काल कानून को लागू न किया तो वह फिर से महाखुमलियों के माध्यम से सड़कों पर उतरेंगे। वैसे हालात के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने कानून बनने के बाद राज्य में इस बाबत विधि विभाग से राय ली है। इसके बाद केंद्र के जनजातीय मंत्रालय को पत्र लिखकर पूछा गया कि क्या संशोधित कानून में अनुसूचित जाति को बाहर रखा गया है या नहीं। जबकि केंद्रीय मंत्रालय 22 अगस्त को ही हिमाचल सरकार को पत्र लिखकर संशोधित कानून को लागू करने को कह चुका है।
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