अनूठी रामलीला: मंच पर एक साथ होती हैं कई पीढ़ियां, दादा बनते परशुराम तो पोता लक्ष्मण की भूमिका में

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Unique Ramlila Many generations come together on stage Parashuram role by grandfather while grandson in role o

दुद्धी की रामलीला के मंच पर एक साथ होती हैं कई पीढ़ियां
– फोटो : अमर उजाला

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सोनभद्र जिले के दुद्धी नगर की रामलीला का इतिहास काफी पुराना है। सिंगरौली स्टेट के समय से यहां रामलीला का मंचन होता आ रहा है, जो आज भी कायम है। पहले इसे नगर के सेठ-आढ़ती मिलकर कराते थे, मगर अब यह जन सामान्य के सहयोग से रामलीला होती है। खास बात यह कि इस लीला का मंचन स्थानीय लोग ही करते हैं। कई कलाकार दशकों से इस रामलीला से जुड़े हैं तो किसी की तीसरी-चौथी पीढ़ी मंचन में लगी है। बस वक्त के साथ उनकी भूमिकाएं बदलती रही हैं। साल भर वह कहीं रहे, लेकिन रामलीला के लिए दुद्धी जरूर आते हैं।

रामलीला मंडली के मैनेजर कमलेश कमल खुद करीब 48 सालों से कैकेयी, सुलोचना, जनक, दशरथ, साधु रावण जैसे अलग-अलग किरदार में अभिनय करते रहे हैं। उनके परिवार के नवयुवक भी विभिन्न भूमिकाओं में रामलीला से जुड़े हैं। देवेंद्र मिश्र करीब 65 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं। उन्होंने बचपन में सबसे पहले शत्रुघ्न की भूमिका निभाई।

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इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ वह भरत, लक्ष्मण, राम, मेघनाथ, परशुराम, अहिरावण और रावण के रोल में भी मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। उनके परिवार की चार पीढ़ी कुछ वर्षों पहले तक एक साथ मंच पर अभिनय करती रही है। चाचा स्व. प्रेमचंद मिश्र रामलीला में व्यास की भूमिका निभाते थे। वहीं देवेंद्र मिश्र रावण और परशुराम की भूमिका में थे। पुत्र नित्यानंद मिश्रा मेघनाथ और पोता लक्ष्मण के किरदार में रहे हैं।

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