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धरने पर बैठे वपक्षी दलों के सदस्य
– फोटो : अभिषेक बड़ू
विस्तार
भाजपा के विरोध में जम्मू के महाराजा हरि सिंह पार्क में प्रदेश की विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता एकत्रित हो गए हैं। जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर आज एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। हालांकि प्रदर्शन में नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अभी नहीं पहुंचे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विकार रसूल वानी, कांग्रेस वरिष्ठ नेता रमन भल्ला सहित अन्य दलों के नेता पहुंचे हैं। गौरतलब है कि तीन अक्तूबर को फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू शहर में विपक्षी दलों की बैठक में प्रदर्शन का फैसला लिया गया था। लेकिन एक घंटा बीत जाने पर भी फारूक और महबूबा के नहीं पहुंचने से असमंजस की स्थिति बन गई है। पहुंचे हुए नेताओं की तरफ से धरनास्थल पर आए हुए लोगों का मनोबल बनाए रखने के लिए प्रयास कि जा रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा सरकार जमीनी स्तर के हालात को जानती है तभी जानबूझ कर चुनाव को लगातार टाल रही है। अब कारगिल चुनाव के नतीजों से सारी स्थिति साफ हो गई है। जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को चुनी हुई लोकप्रिय सरकार से वंचित रखा जा रहा है। सरकार अगर केंद्र और प्रदेश स्तर पर जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावे कर रही है तो चुनाव के समय हालात खराब क्यों दिखाए जा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यहां लंबे समय से संविधान प्रक्रिया को निलंबित किया गया है। वहीं, अनुच्छेद 370 के बाद पहली बार जम्मू में विपक्षी दलों का सामूहिक तौर पर सरकार के खिलाफ ऐसा धरना हो रहा है। धरने से डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) और अपनी पार्टी के नेता बाहर हैं। पूर्व में हुई विपक्षी दलों की बैठक में इन दोनों पार्टियों के नेता नहीं नजर आए थे।
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