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नाम था अमिता बच्चन और काम कर दिया एंग्रीमैन अमिताभ बच्चन का
– फोटो : अमर उजाला
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वैशाली में हुई सिपाही अमिता बच्चन के शहीद होने की खबर मेरे लिए किसी सदमे से कम नहीं। मेरे साथ करीब तीन साल का साथ था। बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के मामले में ऑटो स्टार्ट मोड में रहने के लिए मैं अमिता को हमेशा याद करूंगा। अमिता ने जाते-जाते भी इन दो बातों का आम जनमानस के बीच प्रमाण दे दिया।
अमिताभ बच्चन से शायद प्रेरित था नाम
जब तक मेरे साथ ड्यूटी रही, अमिता ने साये की तरह मेरा साथ दिया। मेरे ज्यादातर रेड में साथ रहे अमिता को मैं एक अदद कांस्टेबल, यानी सिपाही मानकर नहीं चला। उसने मेरे साथ ड्यूटी ज्वाइन करने के साथ ही दिखा दिया कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में वह पीछे हटने वाला शख्स नहीं। हमेशा ड्यूटी पर समय से पहले पहुंचने और हर बात को गंभीरता से समझने के कारण बहुत कम समय में अमिता से हमारा पारिवारिक सदस्य जैसा जुड़ाव हो गया। लोग अमिता को अमिताभ बच्चन भी कह दिया करते थे। अच्छी हाइट थी और पर्सनालिटी भी। शायद नाम भी अमिताभ बच्चन से ही प्रेरित हो।
कोरोना के समय को याद कर आंखें नम
सिपाहियों की ड्यूटी तो लगती रहती है। बदलते भी रहते हैं। लेकिन, अमिता से दूसरे तरह का लगाव था। बेहद आज्ञाकारी स्वभाव के कारण यह शख्स दूसरे तरह से मुझसे जुड़ा था। कोरोना की मुश्किल घड़ियों को याद करता हूं तो आंखें नम हो जाती हैं। आज आंखें नम भी हैं और गर्व से सीना चौड़ा भी हो रहा है। अमिता की यह सामान्य मौत नहीं है। अपराधियों से अकेले लोहा लेते हुए शहीद होने वाले इस सिपाही के प्रति मेरे मन में अब श्रद्धा है। जैसे ही यह सूचना मुझे मिली, मैंने परिवार वालों से बात की। याद आने लगा, जब कुछ ही साल पहले अमिता की शादी हुई। अभी छोटे-छोटे बच्चे हैं। पूरे परिवार के साथ मैं खुद को खड़ा पाता हूं। यह बेहद कष्टदायक है, लेकिन कई बार हम मजबूर हो जाते हैं। वही अभी मैं महसूस कर रहा हूं।
(डीआईजी जयंत कांत के शब्दों में)
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