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(सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के बयान पर ही अभियुक्त को सजा दी जा सकती है, बशर्ते बयान विश्वसनीय व सत्य प्रतीत होता हो। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान का समर्थन मेडिकल व अन्य साक्ष्यों द्वारा भी होना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने शाहजहांपुर के गड़हिया रंगीन थाना क्षेत्र में जनवरी में गेहूं काटने खेत गई 15 वर्षीय किशोरी से पिस्टल की नोक पर दुष्कर्म करने के आरोपियों की उम्र कैद की सजा रद कर दी। इसके साथ ही उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।
यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अनमोल व पप्पू की सजा के खिलाफ दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील में अपर सत्र अदालत शाहजहांपुर द्वारा दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद व 75 हजार रुपये जुर्माने व पाक्सो एक्ट के अपराध में 15 साल की कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की एक साथ चलने वाली सजा को चुनौती दी गई थी।
आरोप है कि आठ जनवरी 2015 की शाम को 15 वर्षीय पीड़िता खेत गई थी, जहां उसे पकड़कर आरोपियों ने बारी-बारी दुष्कर्म किया। पीड़िता खून से लतपथ हालत में अपने चाचा के घर पहुंची और उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद चाचा ने पीड़िता के पिता को मामले की सूचना दी। इसके बाद पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया और पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
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