शरद पूर्णिमा पर बन रहा गजकेसरी समेत 4 अद्भुत संयोग, जानें ग्रहण काल में आसमान के नीचे कब रख सकेंगे खीर

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शरद पूर्णिमा का महत्व

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है. इस साल शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर को है. शरद पूर्णिमा का त्योहार खीर के बिना अधूरा माना जाता है.

Sharad Purnima 2023

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं, इसी के चलते लोग प्रसाद के तौर पर खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं. मान्यता है कि खीर भी अमृत बन जाती है.

Chandra Grahan 2023

28 अक्टूबर दिन शनिवार की रात को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और इस दिन शरद पूर्णिमा भी है. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा और रात 01 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगा और देर रात 2 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा.

Chandra Grahan 2023

शरद पूर्णिमा पर कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है. यह चंद्र ग्रहण तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में लग रहा है और इस दिन चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, जहां पहले से ही गुरु ग्रह विराजमान हैं.

Chandra Grahan 2023

इस तरह चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बन रहा है. गजकेसरी योग के साथ इस दिन रवि योग, बुधादित्य योग, शश योग और सिद्धि योग भी लगने जा रहा है.

Chandra Grahan 2023

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा बेहद शक्तिशाली होता है. इस दिन रात में आसमान के नीचे खीर रखने का विधान है. इस बार शरद पूर्णिमा की रात चंद्र ग्रहण लगेगा.

खीर

ग्रहण काल में खीर रखने पर दूषित हो जाएगी. ऐसे में चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद ही स्नान कर खीर बनाकर ही आसमान के नीचे रखने पर शुभ रहेगा.

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