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भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब
– फोटो : संवाद
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देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के चलते ढालपुर का मैदान ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों की स्वरलहरियों से गूंज उठा। देवताओं के साथ देवलुओं को वाद्ययंत्रों की थाप थिरकता देख हर कोई कुल्लवी रंग में रंग गया। अनूठे नजारे को देखकर देश व विदेशों से आए हुए मेहमान भी रोमांचित हो गए। मौका था दशहरा उत्सव में निकलने वाली भगवान नरसिंह की दूसरी भव्य जलेब का। ढोल-नगाड़ों की थाप पर दशहरा के तीसरे दिन भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकली। जलेब में रूपी घाटी के देवताओं ने चार चांद लगाए दिए। बीच में पालकी में सवार भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार जबकि दाईं और बाईं ओर देवरथों की शोभा देखते ही बन रही थी। लोगों ने इस दिव्य नजारे को अपने कैमरों व मोबाइल में कैद किया।
गुरुवार को करीब 4:00 बजे भगवान नरसिंह की भव्य जलेब की तैयारी शुरू हो गई। 4:15 बजे सबसे पहले भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में बैठे। जबकि हवाई के देवता जमदग्नि ऋषि, शियाह के देवता जमदग्नि ऋषि, मनिहार के देवता गौतम ऋषि, आशणी के देवता भृगू ऋषि, नजां के देवता च्यवन ऋषि, सीस के देवता जमलू भी पहले ही यहां पर पहुंच गए थे। इसके बाद जलेब शुरू हो गई। जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी चली, इसके बाद लाव-लश्कर चला। राजा की चानणी से निकली जलेब ने पूरे मैदान की एक परिक्रमा पूरी की। इसके बाद राजा की चानणी के पास देवलुओं ने नाटी भी डाली। वहीं भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि दशहरा उत्सव में शुक्रवार को भी भव्य जलेब निकलेगी। इसमें सैंज के देवी-देवता शामिल होंगे।
राजा की चानणी के पास देवलुओं ने डाली शानदार कुल्लवी नाटी
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के तीसरे दिन राजा की चानणी के पास देवलुओं ने शानदार नाटी(लोकनृत्य, लोक गायन) डाली।
मान्यता के अनुसार भगवान नरसिंह की जलेब से पहले नाटी डाली जाती है। इस दौरान लोगों ने कुल्लवी नाटी का खूब लुत्फ उठाया। इस दौरान भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी मौजूद रहे।
कुल्लू दशहरा के दूसरे दिन भगवान रघुनाथ के शिविर में दर्शन के लिए लगा श्रद्धालुओं का तांता
कुल्लू दशहरा में आए देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वहीं, भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में भी सुबह से रघुनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। यहां पर भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। भगवान रघुनाथ की ढोल-नगाड़ों की थाप पर चार पहर पूजा भी की जा रही है।
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