Today Grahan Time Bihar : चंद्रग्रहण पर आज बिहार में कब करें गंगा स्नान, क्या करें- जानें; कैसे खीर बने अमृत

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Chandra Grahan 2023 Bihar : chandra grahan 2023 in bihar date and time, what to do in sharad poornima bihar

चंद्रग्रहण की सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


आज शरद पूर्णिमा है लेकिन यह त्योहार चंद्र ग्रहण के साये में मनाया जाएगा। यह ग्रहण बिहार समेत पूरे भारत में आधी रात को लगेगा। हालांकि, इसका सूतक दोपहर में ही शुरू हो जाएगा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर दिन में ही पूजा-अर्चना समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हालांकि, आज चंद्रमा की शीतल रोशनी में बनाई जाने वाली खीर ग्रहण के कारण आधी रात को नहीं बनाई जाएगी। पंडितों का मानना है कि यह स्थिति नौ साल के बाद बन रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह ग्रहण अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि पर लगेगा। ऐसे में खीर बनाने से पूर्व उससे जुड़े नियमों के बारे में आपको जानना होगा।

पंडितों के अनुसार,  इस बार चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर 2023 की रात्रि में 1 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 23 मिनट तक लगेगा। इसी दिन शरद पूर्णिमा भी है। इस दिन खीर को रात्रि में घर के आंगन या छत पर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रात्रि आसमान से अमृत की वर्षा होती है। पंडित हीरा झा ने आज चंद्रमा की अमृत वर्षा 2.23 मिनट रात्रि के बाद होगी। इसलिए इससे मानने वाले या तो दोपहर 4.05 बजे दिन के पहले खीर बनाकर उसमें तिल और कुश डालकर और अच्छे से ढंक कर रख दें। मध्य रात्रि 2.23 बजे के बाद तुरंत स्नान कर खीर बनाकर अपने छत पर रख दें। 

शरद पूर्णिमा पर खीर खाने का लाभ

हिंदू धर्म में चांद का भी अधिक महत्व होता है। और शरद पूर्णिमा के दिन चांद की रोशनी पड़ने हमारे जीवन में शांति आती है। चांद की रोशनी को हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसलिए इस रात आसमान के नीचे खीर बनाकर रखी जाती हैं। बाद में इसका सेवन करने से हमें औषधीय गुण भी प्राप्त होते हैं।

खीर बनाने से पहले यह नियम जरूर जान लें

इस साल शरद पूर्णिमा पर आपको सावधानी बरतने की आवश्कता रहेगी। क्योंकि इस बार शरद पूर्णिमा पर शाम चार बजे सूतक लग जाएगा। ऐसे में चंद्रग्रहण तक खीर बनाना निषेध रहेगा। ऐसे में आप खीर बनाने के लिए गाय के दूध में सूतक काल शुरू होने के पहले कुशा डाल दें। फिर उसे ढककर रख दें। इससे सूतक काल के दौरान दूध शुद्ध रहेगा। बाद में आप इसकी खीर बनाकर भोग लगा सकेंगे। इस दौरान खीर बनाने की प्रक्रिया ग्रहण खत्म होने के बाद शुरू की जाएगी। फिर भोर में आप अमृत वर्षा के लिए इसे खुले आसमान के नीचे रख सकते हैं।

चंद्र ग्रहण के बाद गंगा स्नान का अलग महत्व है

पंडित हरि शंकर मिश्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण के बाद गंगा स्नान का अलग महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में नहाने के बाद मंदिरों में दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ग्रहण काल के बाद गंगा घाटों में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही संबंधित व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। 

जानिए, इस बार इस राशि में लग रहा चंद्र ग्रहण 

28 अक्तूबर की मध्य रात्रि को शुरू होने वाला चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा। मेष राशि में लगने की वजह से इस राशि के जातकों को ग्रहण के अशुभ परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। साल के आखिरी चंद्र ग्रहण का प्रभाव मेष राशि के लोगों के मन और मस्तिष्क पर पड़ेग। 

 

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