Himachal: हिमाचल की सालाना 2,000 करोड़ रुपये की आमदनी पर केंद्र का रोड़ा, वाटर सेस को तुरंत हटाने के लिए कहा

[ad_1]

Center blocks Himachal's annual income of Rs 2,000 crore, asks for immediate removal of water cess

जलविद्युत परियोजना(सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


 हिमाचल प्रदेश में 2,000 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी पर केंद्र सरकार ने रोड़ा डाल दिया है। आपदा से उबर रहा हिमाचल प्रदेश वाटर सेस से अच्छी आमदनी होने की उम्मीद कर रहा है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को सलाह दी है कि वह बिजली परियोजनाओं से किसी भी तरह की टैक्स ड्यूटी और सेस को, जो कि विकास शुल्क या फंड के नाम पर लगाया जा रहा है, उसे लेना तुरंत बंद करे। यही सलाह हिमाचल प्रदेश सहित ऐसे तमाम राज्यों को दी गई है जो इस तरह का कर थर्मल, हाइड्रो या नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन के मामले में लगा रहे हों। इस तरह के सेस को तुरंत हटाने के लिए कहा गया है।

इस संबंध में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक सुरेश अन्नेपू ने हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों के लिए एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के अनुसार भारत सरकार के ध्यान में यह आया है कि कुछ राज्यों की सरकारें विभिन्न स्रोतों से पैदा की जाने वाली बिजली पर अतिरिक्त शुल्क लगा रही हैं। यह शुल्क विकास या फंड एकत्रीकरण के रूप में लगाया जा रहा है। तमाम अतिरिक्त शुल्क, फीस या बिजली के उत्पादन में किसी भी तरह का टैक्स या ड्यूटी जो सभी प्रकार के उत्पादन के लिए लगाई जाती है जैसे वायु, सोलर, न्यूक्लियर आदि यह असांविधानिक है।

कानूनी स्थिति ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 25 अप्रैल, 2023 को भेजे पत्र में भी स्पष्ट हो चुकी है। इसमें कुछ राज्यों की ओर से लगाए जा रहे वाटर सेस पर भी स्थिति स्पष्ट की गई। इस संबंध में दोबारा से सांविधानिक प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं। संविधान की दूसरी सूची में राज्यों को कर लगाने के लिए अधिकृत किया गया है। इसे बिजली बेचने या उपभोग पर डिलीवरी टैक्स के रूप में लगाया जाता है। इसमें बिजली की पैदावार पर किसी भी तरह का अतिरिक्त टैक्स या शुल्क नहीं जोड़ा गया है।

एक राज्य में उत्पादित की गई बिजली का उपभोग दूसरे राज्यों में होता है। ऐसे में कोई भी राज्य किसी अन्य राज्य के नागरिकों पर टैक्स या शुल्क लगाने के लिए अधिकृत नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 286 में राज्यों को प्रतिबंधित किया गया है। वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगाने से रोका जाता है, जिसमें आपूर्ति राज्य से बाहर होती हो। संविधान का अनुच्छेद 287 और 288 केंद्र सरकार की ओर से उपभोग की गई या केंद्र सरकार को बेची गई बिजली पर भी टैक्स लगाने को प्रतिबंधित करता है, जिसे राज्य या किसी अन्य एजेंसी ने बेचा हो।

वाटर सेस आयोग भी खोल दिया है हिमाचल ने

प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने 175 बिजली परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाया गया है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने तो वाटर सेस आयोग भी खोल दिया है। आयोग की ओर से बिल भेजे जा रहे हैं। प्रदेश में बिजली परियोजनाएं स्थापित कर चुके कुछ निजी उपक्रमों के साथ-साथ कई निजी परियोजनाओं को चला रही कंपनियों ने भी पैसा जमा करवा दिया है।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *