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एलजी वीके सक्सेना
– फोटो : ANI
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दिल्ली में खतरनाक हुए प्रदूषण स्तर के बीच शुक्रवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में सभी अधिकारियों को प्लान बनाकर प्रदूषण स्तर को कम करने की दिशा में काम करने का आदेश दिया है। साथ ही पड़ोसी राज्याें से सहयोग मांगा गया है। उपराज्यपाल ने एक दीर्घकालिक स्थायी कार्य योजना बनाने का आदेश दिया है। साथ ही इसे सख्ती से लागू करने को कहा है।
इस बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जगह पर्यावरण मंत्री गोपाल राय शामिल हुए। बैठक में उन्होंने अधिकारियों के सहयोग न करने का मामला उठाया। साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ बैठक कर प्रदूषण फैलाने वाले कारणों पर अंकुश लगाने की अपील की।
बैठक में उपराज्यपाल ने आदेश दिया कि दिल्ली का प्रदूषण स्तर चिंताजनक हो गया है। ऐसे में सभी विभाग और एजेंसियां अपने अधिदेश की परवाह किए बिना प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम करेगी। पर्यावरण विभाग लोगों के लिए सलाह जारी करेगा। इसमें कहा जाएगा कि बच्चे और बुजुर्ग अतिरिक्त देखभाल करें। जहां तक संभव हो घर के अंदर रहे। लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी जाएगी। साथ ही सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को कहा जाएगा, जिससे सड़कों पर वाहनों की कमी हो। इससे कम मात्रा में उत्सर्जन होगा। धूल प्रदूषण में भी कमी आएगी।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के नियम के तहत ग्रैप को सख्ती से लागू किया जाएगा। सभी मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर, वॉटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाएगा। इन्हें डबल शिफ्ट में भी चलाया जा सकता है।
प्रदूषण से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार रहेगा। किसी भी आपातस्थिति के लिए विभाग प्लान तैयार रखेगा। साथ ही फसल के अवशेष को जलाने से रोकने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। पड़ोसी राज्य खासकर पंजाब से अपील की जाएगी कि वह ऐसी घटनाओं को रोके। ताकि दिल्ली में पराली के धुंए को कम किया जा सकें।
डीपीसीसी चेयरमैन पर हो कार्रवाई
बैठक के बाद गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण को कम करने में स्मॉग टॉवर अहम भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इन्हें ठप कर दिया गया। इन्हें ठप करने वाले दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अध्यक्ष पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बिना कैबिनेट के आदेश और अध्ययन करवाए इस टॉवर को बंद कर दिया। मंत्री ने कहा कि बैठक में अधिकारियों के सहयोग का मुद्दा उठाया गया। साथ ही कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों को आदेश दिया जाए कि वह सरकार के साथ बैठक में शामिल हो, ताकि आदेश को जमीन पर उतारा जा सकें। अभी तक देखा गया है कि अधिकारी बैठक से दूरी बनाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा में आने वाले एनसीआर के क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए उच्च स्तरीय बैठकर होकर इसपर नियंत्रण लगाना होगा। एनसीआर में डीजल की बसें न चले। दिल्ली में इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहन चलते हैं। एनसीआर में भी ऐसी ही बसें चलनी चाहिए।
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