Delhi News: पुरानी पेंशन बहाली के लिए रामलीला मैदान में चेतावनी रैली

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शिक्षकों, केंद्र व राज्य कर्मियों, पेंशन भोगियों ने केन्द्र सरकार को दिखाई ताकत

15 दिन में मांगें पूरी नहीं की तो करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।

पुरानी पेंशन बहाली, ठेका कर्मियों को नियमित करने, निजीकरण पर रोक, खाली पदों को भरने, आठवें वेतन आयोग का गठन, 18 महीने के बकाया डीए का भुगतान करने, नई शिक्षा नीति पर रोक जैसी मांगों को लेकर केंद्र एवं राज्यकर्मियों ने रामलीला मैदान में चेतावनी रैली आयोजित की। रैली में देश के सभी राज्यों के हजारों की तादाद में कर्मचारी मौजूद रहे। सुबह से ही कर्मचारी जुलूस की शक्ल में रैली में पहुंचने लगे। दोपहर करीब एक बजे तक यह सिलसिला जारी रहा। दोपहर ढाई बजे रैली समाप्त हुई। रैली में सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर 15 दिन के अंदर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो देशव्यापी हड़ताल करेंगे। लोकसभा चुनाव में करीब 80 करोड़ कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के वोट से मौजूदा सरकार को हाथ धोना पड़ेगा।

रैली की अध्यक्षता सुभाष लांबा ने की, साथ में रूपक सरकार, सीएन भारती, अशोक थूल और राजेन्द्रन जैसे फेडरेशन के नेताओं ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। इसमें राज्य व केंद्र सरकार के कर्मचारी, शिक्षक, पेंशन भोगी शामिल थे। सीआईटीयू के महासचिव तपन सेन ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। संसद में पीएफआरडीए एक्ट को पारित करने वाले दल भी अब पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीटू कर्मचारियों की रैली और मांगों का समर्थन करता है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ, कंफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाइज एंड वर्कर्स, स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया और अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के बैनर तले रैली आयोजित की गई।

पूंजीपतियों के कर्ज माफ कर रही सरकार

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि सरकार के पास पूंजीपतियों के लाखों करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने, कार्पोरेट टैक्स को 30 से घटाकर 22 फीसदी करने के लिए पर्याप्त धन है, लेकिन पुरानी पेंशन बहाली, ठेका कर्मियों को पक्का करने, खाली पदों को भरने के लिए धन नहीं। सरकार ने मांगें नहीं मानी तो होने वाले लोकसभा चुनाव में करीब 80 करोड़ कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के वोट से हाथ धोना पड़ेगा। फेडरेशन के महासचिव ए श्री कुमार ने कहा कि सरकार जनसेवाओं और पीएसयू को निजी हाथों में सौंपकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से छुटकारा पाना चाहती है।

18 महीने का बकाया डीए डीआर नहीं दिया

कंफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाइज एंड वर्कर्स फेडरेशन के सचिव एसबी यादव ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन बहाली करने के बजाय एनपीएस में संशोधन कर कर्मचारियों के आक्रोश को कम करना चाहती है। जीएसटी की रिकाॅर्ड कलेक्शन के बावजूद सरकार कोरोना में रोके गए कर्मचारियों व पेंशनर्स के 18 महीने का डीए डीआर का भुगतान नहीं कर रही। एनएफपीई के सेक्रेटरी जरनल जनार्दन मंजूमदार ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ हड़ताल के कारण एनएफपीई और क्लास थ्री यूनियन की मान्यता रद्द कर दी गई है।

नई शिक्षा नीति को बताया देश विरोधी

एसटीएफआई के महासचिव सीएन भारती ने नई शिक्षा नीति को देश विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संसद में पारित किए बिना ही देश में नई शिक्षा नीति लागू कर रही है। एनईपी से शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष अशोक थूल ने कहा कि केंद्र सरकार पेंशन भोगियों की बेसिक पेंशन को 80 साल में पांच फीसदी बढ़ोतरी करने से भाग रही है।

ठेके पर काम कराना बंद करे सरकार

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के कोषाध्यक्ष शशीकांत राय ने कहा कि सरकार को ठेके पर कर्मचारियों से काम कराना बंद करना पड़ेगा। पचास लाख से ज्यादा ठेका संविदा कर्मचारी केन्द्र एवं राज्य सरकारों एवं पीएसयू में कार्यरत हैं। सरकार इनसे काम ज्यादा तेजी है और वेतन कम देती है। न इन्हें सेवा सुरक्षा मिल रही और न ही रेगुलर करने की नीति बना रही है।

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