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– फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस में तैनात राजस्व लिपिक की एक वेतन वृद्धि को स्थायी रूप से रोकने के जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अनुशासनिक कार्यवाही के तहत वृहद दंड तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि कर्मचारी को मौखिक सुनवाई का अवसर न दे दिया जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत ने हाथरस की सादाबाद तहसील के राजस्व लिपिक सौरभ की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। राजस्व अभिलेखों में लाल स्याही, सफेदा के प्रयोग और उनके रखरखाव में अनियमितता जैसे छह आरोपों में निलंबित कर याची के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की गई थी। उप जिलाधिकारी सासनी की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी हाथरस ने राजस्व लिपिक की एक वेतन वृद्धि को स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया था।
याची के अधिवक्ता किशन गौतम मिश्रा ने दलील दी कि याची को न तो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही जांच आख्या की प्रति उपलब्ध कराते हुए सुुनवाई का अवसर ही प्रदान किया गया। कोर्ट ने अनुशासनिक कार्यवाही से संबंधित अभिलेखों और दलीलों के आधार पर याचिका स्वीकार करते हुए 24 अप्रैल 2023 को याची के विरुद्ध जिलाधिकारी की ओर से पारित दंडादेश को निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने मामले को अनुशासनिक प्राधिकारी को वापस करते हुए निर्देश दिया है कि याची को जांच आख्या की प्रति उपलब्ध करवाते हुए सुनवाई का अवसर दिया जाए। इसके बाद अनुशासनिक प्राधिकारी विधि सम्मत नया आदेश पारित करें, तब तक याची की सेवाओं की बहाली कायम रहेगी।
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