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होटल कारोबारी निशांत शर्मा।
– फोटो : संवाद
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हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक की ओर से शिमला में दर्ज करवाई गई एफआईआर के मामले में होटल कारोबारी निशांत शर्मा ने सवाल पूछा कि डीजीपी यह बताएं कि उन्हें शिमला क्यों बुलाया गया। वह तो हिमाचल के डीजीपी का नाम तक नहीं जानते थे। उन्होंने डीजीपी को भेजी ई-मेल पर अभद्र भाषा के आरोप को निराधार करार दिया।
पालमपुर में पत्रकारों से बातचीत में एडवोकेट एवं होटल कारोबारी निशांत शर्मा ने कहा कि उनके माता-पिता गुरुग्राम में रहते हैं। 24 अगस्त को उन्हें लेने वह गुरुग्राम गया था। 25 अगस्त को उस पर हमला होता है। उनका कारोबार धर्मशाला के भागसू में भी है। 27 अक्तूबर को उन्हें डीजीपी के कार्यालय से कई फोन आए। उन्हें यह नहीं पता था कि यह फोन डीजीपी कार्यालय से आए हैं।
उन्होंने कोई फोन उठाया नहीं। 27 अक्तूबर को ही शाम को धर्मशाला के भागसू और मैक्लोडगंज के बीच के रास्ते में दो बाइक सवारों ने उनका पीछा किया। गुरुग्राम के मारपीट वाले मामले को वापस लेने की बात कही। इसकी शिकायत उन्होंने एसपी कांगड़ा से भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। निशांत ने आशंका जताई कि उन्हें किसी झूठे मामले में फंसाया जा सकता है।
उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृह सचिव को भी ईमेल से जानकारी दे दी है। कहा कि डीजीपी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए। अन्यथा, वह हाईकोर्ट जाएंगे। वहीं, निशांत शर्मा ने एसपी शिमला को ईमेल भेजकर अपने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। गौरतलब है कि निशांत पर शिमला में डीजीपी की ओर से केस दर्ज करवाया गया है। उधर, डीजीपी संजय कुंडू ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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