Varanasi: शहर की आबादी लगभग 42 लाख और 26 बेड का बर्न वार्ड, प्लास्टिक सर्जन भी नहीं आखिर कैसे होगा इलाज?

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population of the city is about 42 lakh and there is a burn ward of 26 beds, there is not even a plastic surge

मंडलीय अस्पताल का बर्न वार्ड
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार


स्वास्थ्य विभाग चाहे कितने भी पर्याप्त संसाधन का दावा कर ले, लेकिन हकीकत कुछ और है। खुदा ना ख्वास्ता अगर दीपावली पर कोई अनहोनी हो गई तो यहां इलाज कराना बड़ी चुनौती होगी। सरकारी अस्पताल में मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में 20 बेड का ही बर्न वार्ड है। जबकि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में मात्र 6 बेड का बर्न वार्ड है। अगर कोई बड़ी घटना हो जाए तो लोगों को प्राइवेट अस्पताल में रेफर करने की नौबत आ जाए।

आम तौर पर दीपावली पर स्वास्थ्य विभाग इलाज की मुकम्मल व्यवस्था होने का दावा तो करता है। लेकिन, हकीकत ये है कि बीते दस साल से मंडलीय अस्पताल के 20 बेड के बर्न वार्ड के भरोसे ही पूरा जिला है। अब तक संसाधनों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। अस्पताल में तो मौजूदा समय में एक भी प्लास्टिक सर्जन नहीं है। दस साल पहले प्लास्टिक सर्जन डॉ. एके प्रधान के रिटायरमेंट के बाद से किसी की तैनाती नहीं हुई।

जिला अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों से भी रेफर होकर आते मरीज

जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी झुलसने वालों के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। यहां प्लास्टिक सर्जन की तैनाती की बात तो दूर बर्न वार्ड तक नहीं है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में पूरे जिले के मरीजों का दबाव मंडलीय अस्पताल पर ही रहता है।

 

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