जम्मू कश्मीर: रूबिया सईद मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ यासीन मलिक, गवाहों का नहीं किया विरोध

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जम्मू कोर्ट में पेश होने के लिए जाती रूबिया सईद (फाइल)

जम्मू कोर्ट में पेश होने के लिए जाती रूबिया सईद (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला

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पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण मामले में आरोपी यासीन मलिक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुआ। इस समय वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। पेशी के दौरान यासीन ने क्रॉस एग्जामिनेशन के वक्त गवाहों का विरोध नहीं किया।

बता दें कि इस मामले में यासीन को कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश होना था, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से उसकी मूवमेंट पर रोक लगाई गई है। सीनियर पब्लिक प्रॉसीक्यूटर एसके भट्ट ने बताया कि यासीन पेश हुआ और उसने गवाहों का विरोध नहीं किया।

भट्ट ने कहा कि मैंने सीबीआई की तरफ से कोर्ट में कहा कि उसको व्यक्तिगत पेश न करने का प्रोडक्शन वारंट जारी नहीं होना चाहिए। इस अर्जी को कोर्ट ने मंजूर कर लिया और प्रोडक्शन वारंट जारी नहीं किया। 23 दिसंबर को इस मामले पर अगली सुनवाई होनी है।

इसके लिए अन्य गवाहों को पेश करने के लिए कहा गया है। रूबिया इस मामले में पेश नहीं हुई है, क्योंकि उसने न पेश होने की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट स्वीकार कर चुका है। वीरवार को दो गवाहों के बयान दर्ज होने थे। इनमें एक रिटायर डॉक्टर है, जो कोर्ट में पेश हुआ, जबकि दूसरा सऊदी अरब में है, जो पेश नहीं हो सका।

एक अन्य गवाह भी था, जो बीमारी के चलते पेश नहीं हुआ। उसने भी इसकी अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। रिटायर्ड डॉक्टर ने यासीन मलिक की मौजूदगी में बयान दिया। भट्ट ने कहा कि यासीन व्यक्तिगत तौर पर पेश होना चाहता था।

इसकी उसने अर्जी भी दी थी, लेकिन यह सुरक्षा कारणों से संभव नहीं है। बता दें कि पिछली बार 15 जुलाई की सुनवाई में रूबिया ने यासीन समेत 5 लोगों को कोर्ट में पहचाना था।

बताया कि श्रीनगर के लाल देड अस्पताल के बाहर से दिसंबर 8, 1989 को उक्त लोगों ने उसका अपहरण किया था। पांच दिन अपहरण करके रखने के बाद वीपी सिंह की केंद्र सरकार ने 5 आतंकियों को छोड़ा था। इसके बाद रूबिया को छोड़ा गया था।

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण मामले में आरोपी यासीन मलिक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुआ। इस समय वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। पेशी के दौरान यासीन ने क्रॉस एग्जामिनेशन के वक्त गवाहों का विरोध नहीं किया।

बता दें कि इस मामले में यासीन को कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश होना था, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से उसकी मूवमेंट पर रोक लगाई गई है। सीनियर पब्लिक प्रॉसीक्यूटर एसके भट्ट ने बताया कि यासीन पेश हुआ और उसने गवाहों का विरोध नहीं किया।

भट्ट ने कहा कि मैंने सीबीआई की तरफ से कोर्ट में कहा कि उसको व्यक्तिगत पेश न करने का प्रोडक्शन वारंट जारी नहीं होना चाहिए। इस अर्जी को कोर्ट ने मंजूर कर लिया और प्रोडक्शन वारंट जारी नहीं किया। 23 दिसंबर को इस मामले पर अगली सुनवाई होनी है।

इसके लिए अन्य गवाहों को पेश करने के लिए कहा गया है। रूबिया इस मामले में पेश नहीं हुई है, क्योंकि उसने न पेश होने की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट स्वीकार कर चुका है। वीरवार को दो गवाहों के बयान दर्ज होने थे। इनमें एक रिटायर डॉक्टर है, जो कोर्ट में पेश हुआ, जबकि दूसरा सऊदी अरब में है, जो पेश नहीं हो सका।

एक अन्य गवाह भी था, जो बीमारी के चलते पेश नहीं हुआ। उसने भी इसकी अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। रिटायर्ड डॉक्टर ने यासीन मलिक की मौजूदगी में बयान दिया। भट्ट ने कहा कि यासीन व्यक्तिगत तौर पर पेश होना चाहता था।

इसकी उसने अर्जी भी दी थी, लेकिन यह सुरक्षा कारणों से संभव नहीं है। बता दें कि पिछली बार 15 जुलाई की सुनवाई में रूबिया ने यासीन समेत 5 लोगों को कोर्ट में पहचाना था।

बताया कि श्रीनगर के लाल देड अस्पताल के बाहर से दिसंबर 8, 1989 को उक्त लोगों ने उसका अपहरण किया था। पांच दिन अपहरण करके रखने के बाद वीपी सिंह की केंद्र सरकार ने 5 आतंकियों को छोड़ा था। इसके बाद रूबिया को छोड़ा गया था।



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