पंचांग: त्योहारों के बाद अब लगन.. देवउठनी एकादशी से बैंड-बाजा-बरात

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After festival now marriage start in gorakhpur

शादी। (सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला

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त्योहारों के बाद अब लोग लगन की तैयारी में जुट गए हैं। पांच महीने बाद भगवान विष्णु 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर योग निंद्रा से जागृत होंगे। देव के उठने के साथ ही एक तरफ जहां चातुर्मास का समापन होगा, वहीं दूसरी तरफ तुलसी शालिग्राम का विवाह के साथ विवाह मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी। लगन मुहूर्त की शुरुआत 24 नवंबर से होगी, वहीं इसका समापन 13 दिसंबर को हो जाएगा। इस बीच कुल 13 दिनों तक बैंड-बाजा-बरात के लिए शुभ मुहूर्त होंगे।

वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन कार्तिक शुक्ल एकादशी का मान संपूर्ण दिन और रात आठ बजकर 21 मिनट तक है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र भी शाम बजकर 23 मिनट है। इस दिन छत्र नामक औदायिक योग है। सूर्योदय की तिथि में एकादशी होने से देवउठनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा।

देव उठनी एकादशी का महत्व

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, देवउठनी एकादशी व्रत करने से व्रतियों को सहस्रों अश्वमेध का फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से उसे वीर, पराक्रमी और यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक, पुण्यवर्धक और ज्ञानियों को मुक्तिदायक सिद्ध होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्नता देने वाला और विष्णु धाम की प्राप्ति कराने वाला है। इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों का घर में निवास हो जाता है।

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