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हाईकोर्ट ने कैदियों को ई-मुलाकात सुविधा देने पर रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और जेल अधिकारियों से इस पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है कि ई-मुलाकात की सुविधा उन सभी कैदियों को क्यों नहीं दी जानी चाहिए जिनके रिश्तेदार राष्ट्रीय राजधानी से बाहर रहते हैं। ई-मुलाकात प्रणाली के माध्यम से किसी कैदी के परिवार का कोई सदस्य आधिकारिक वेबसाइट पर खुद को पंजीकृत करने और संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे बात कर सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल में कैदियों से मिलने के लिए रिश्तेदारों को अपने मूल स्थान से दिल्ली आना पड़ता है। अदालत ने कहा सभी संबंधित पक्षों को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि ई-मुलाकात (आभासी मुलाकात) की सुविधा समान स्थिति वाले सभी कैदियों तक क्यों नहीं बढ़ाई जानी चाहिए, जिनके रिश्तेदार दिल्ली में नहीं रहते हैं और मुलाकात के उद्देश्य से उन्हें दिल्ली आना पड़ता है।
अदालत ने यह आदेश तिहाड़ जेल में बंद एक कैदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची ने दिल्ली सरकार और जेल महानिदेशक को यह निर्देश देने की मांग की है कि उसे अपने परिवार या दोस्तों के साथ हर हफ्ते दो ई-मुलाकात करने की अनुमति दी जाए ताकि वह गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर पड़ी अपनी मां की देखभाल और अपने सामाजिक संबंधों को बनाए रखने के लिए मुलाकात कर सके।
कैदी ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता नताशा नरवाल के मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए हर दिन पांच मिनट टेली-कॉलिंग की अनुमति भी मांगी है। उच्च न्यायालय ने मामले को 29 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
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