Captain Pranjal: बरसती गोलियों में ढाल बन गए कैप्टन, आखिरी सांस तक हमें बचाया; महिलाओं ने बताई उस रात की कहानी

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Captain Pranjal Martyr women told Captain become a shield from raining bullets saved us till his last breath

राजोरी
– फोटो : संवाद

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कालाकोट के बाजीमाल इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान तीन बच्चों और एक महिला की जान बचाते हुए बलिदान हुए कैप्टन प्रांजल की बहादुरी इन दिनों राजोरी में हर किसी की जुबान पर है। बचाई गई महिला फातिमा बी उसकी जेठानी शहनाज कौसर और अन्य शनिवार को परिवार सहित सामने आईं और उस दिन की घटना बताई। 

घटना सुनाते हुए महिला रोने लगी और बलिदानी कैप्टन को दुआएं देने लगी। फातिमा बी ने बताया कि जब सेना तलाशी लेते हुए उनके टेंट (अस्थायी घर) के पास पहुंची तो दोनों पाकिस्तानी आतंकी पास में खड़े थे। जैसे ही उन्होंने सेना को देखा अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। 

गोलाबारी से सेना के दो जवान घायल होकर गिर गए और अन्य जवानों ने मोर्चा संभाला। इस बीच आतंकी गुफा में छिप गए। उस समय तक कैप्टन प्रांजल जिंदा थे। जैसे ही उन्होंने हमें फंसा हुआ पाया तो जान की परवाह किए बिना टेंट की ओर दौड़े। 

सरफराज बताती हैं कि तब उसकी गोद में एक महीने का बच्चा था। टेंट में तीन साल का बेटा, एक बेटी और उसकी जेठानी भी थी। गोलाबारी में वह मान चुकी थी कि आज जिंदा नहीं रहेंगी लेकिन कैप्टन ने उसके दो बच्चों को उठाया और महिलाओं को साथ लेकर वहां से भागे। 

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