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वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए जाती मशीन
– फोटो : अमर उजाला
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सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने की जद्दोजहद में रोज नई अड़चनें सामने आ रही हैं। सुरंग में फैले मलबे के बीच स्टील, गार्डर और लोहे के सरिये आने से ऑगर मशीन आगे नहीं बढ़ पा रही। ऐसे में पहाड़ी के ऊपरी छोर से ड्रिलिंग की भी तैयारी है, लेकिन इसमें खतरा बरकरार है।
चट्टानों की कमजोर बनावट ड्रिलिंग के कंपन से कभी भी भर भराकर गिर सकती है, विशेषज्ञ भी इससे आशंकित हैं। सिलक्यारा में अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स के देखरेख में चल रहे ऑपरेशन में विशेषज्ञ वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ ने कहा, वर्टिकल ड्रिलिंग भी एक विकल्प है, लेकिन संभवतया अंतिम विकल्प हो।
कहा, इसमें खतरा बहुत ज्यादा है। जिस क्षेत्र में सुरंग का निर्माण किया गया है, वहां चट्टानें बहुत कमजोर हैं, जो भारी भरकम मशीन के कंपन से कभी भी भर भराकर गिर सकती हैं। सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी इस बात को लेकर आशंकित हैं। इधर, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमों ने वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए प्लेटफार्म तैयार कर लिया है, लेकिन इन्हीं आशंकाओं के चलते अभी अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।
बताया जा रहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर अंतिम फैसला सतलज जल विद्युत निगम और ऑयल एंड नैचुरल गैस कोऑपरेशन के अधिकारी ही लेंगे। ड्रिलिंग के लिए इंजीनियरों की टीम लगातार पहाड़ी पर पहुंचकर संभावनाओं की तलाश कर रही है।
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