HP High Court: दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाले आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाले आरोपी रनजोध सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के संगीन आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अग्रिम जमानत पर रिहा करते हुए जांच एजेंसी और आरोपी के बीच दीवार खड़ी नहीं की जा सकती। आरोपी की पत्नी ने 3 नवंबर 2022 को पुलिस थाना पांवटा साहिब में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस को बताया गया कि उसकी शादी आरोपी से वर्ष 2011 में सिक्ख धर्म की रीति रिवाज से हुई थी। शुरू से ही आरोपी उसे प्रताड़ित करता रहता था।

2 नवंबर की रात को आरोपी नशे की हालत में आया और शिकायतकर्ता की बेरहमी से पिटाई की। पड़ोसियों की मदद से उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाया गया। अस्पताल में डॉक्टर ने पाया कि शिकायतकर्ता को गंभीर चोटें आई हैं। आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह निर्दोष है। शिकायतकर्ता को सीढ़ी से गिरने के कारण चोटें आई हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टतया आरोपी का जुर्म में संलिप्त होना पाया है। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी ने वर्ष 2020 में शिकायतकर्ता के पिता से 4-5 लाख रुपये लिए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।  

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाले आरोपी रनजोध सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के संगीन आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अग्रिम जमानत पर रिहा करते हुए जांच एजेंसी और आरोपी के बीच दीवार खड़ी नहीं की जा सकती। आरोपी की पत्नी ने 3 नवंबर 2022 को पुलिस थाना पांवटा साहिब में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस को बताया गया कि उसकी शादी आरोपी से वर्ष 2011 में सिक्ख धर्म की रीति रिवाज से हुई थी। शुरू से ही आरोपी उसे प्रताड़ित करता रहता था।

2 नवंबर की रात को आरोपी नशे की हालत में आया और शिकायतकर्ता की बेरहमी से पिटाई की। पड़ोसियों की मदद से उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाया गया। अस्पताल में डॉक्टर ने पाया कि शिकायतकर्ता को गंभीर चोटें आई हैं। आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह निर्दोष है। शिकायतकर्ता को सीढ़ी से गिरने के कारण चोटें आई हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टतया आरोपी का जुर्म में संलिप्त होना पाया है। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी ने वर्ष 2020 में शिकायतकर्ता के पिता से 4-5 लाख रुपये लिए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।  



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