अमर उजाला संवाद: मौकों में दिक्कतें नहीं, दिक्कतों में मौका तलाश करें, सफलता और विकास की यही कुंजी- गोपाल दास

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Amar Ujala Samvad: gaur Gopal Das said There are no problems in opportunities look for opportunities in proble

Amar Ujala Samvad jammu kashmir
– फोटो : संवाद

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सफलता और विकास के चार सूत्र हैं। पहला इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी। यानी आप जो बनना चाहते हैं, उसके लिए मेहनत आपके टीचर, माता-पिता, आपके बॉस या दोस्तों को नहीं, बल्कि आपको ही करनी होगी। दूसरा पाजिटिव सेल्फ टाक, नेगेटिव सेल्फ टाक को बदलें। इसे नहीं बदला तो कुछ नहीं बदल पाएंगे। तीसरा मौकों में दिक्कतें मत तलाशें, दिक्कतों में मौका तलाशे। चौथा वर्तमान में भविष्य सोचें। बीते कल और आने वाले कल का नहीं। सफलता और विकास के इन चार मूल मंत्रों को मोटिवेशनल स्पीकर एवं लाइफ स्टाइल कोच गौर गोपाल दास ने वीरवार को अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में सांझा किया। प्रदेश के नामी लोगों और विद्यार्थियों से खचाखच भरे जम्मू कन्वेंशन सेंटर में गोपाल दास मोटिवेट करने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि सक्सेस की स्पेलिंग में से आप यू निकाल दें तो कुछ नहीं बचेगा। अगर राष्ट्र, राज्य, शहर या संस्था का विकास करना है तो उसकी कामयाबी की परिभाषा आपके बिना पूरी नहीं हो सकती। उदाहरण देते कहा कि बच्चे मजाकिया बात करते हैं। कई बार शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच जो बातचीत होती है, उससे हमें सफलता की कुंजी मिल जाती है। एक कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा, एक बार एक क्लास में टीचर ने बच्चों से कहा कि आप सभी एक वाक्य लिखें, लेकिन उसमें 10 शब्द होने चाहिए, जिसमें हर शब्द दो ही अक्षर का हो और सारे शब्द सार्थक भी हों।

जब बच्चों को जवाब नहीं मिला तो टीचर ने बोर्ड पर पहले पांच शब्द लिखे- इफ इट इज टू बी… यानी अगर जिंदगी में कुछ होना है, कुछ हासिल होना है, ऊंचाइयों पर पहुंचना है…। अब बच्चों ने सोचा कि अगले पांच शब्द कौन से होंगे। टीचर ने आगे लिखा- इट इज अप टू मी। यानी इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी। यानी आप जो बनना चाहते हैं, उसके लिए मेहनत आपके टीचर, माता-पिता, आपके बास या दोस्तों को नहीं, बल्कि आपको ही करनी होगी।

गोपाल दास ने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा कि लोग कहते हैं कि वजन कम करके क्या करेंगे, सबको एक दिन मरना है। अगले जनम में तीन किलोग्राम से ही जिंदगी शुरू होगी। वजन घटाना वो जिम ट्रेनर या न्यूट्रिशनिस्ट की जिम्मेदारी बना देते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि इफ इट इज टू बी, इट इज अप टू मी। अच्छे टीचर श्रेष्ठ कहानियों का निर्माण नहीं करते, जब सीख लेने वाले जिम्मेदारी उठाते हैं, तब बदलाव आता है। तब तक विकास संभव नहीं, जब तक हर इंसान जिम्मेदार नहीं। विकास के लिए जिम्मेदारी, उत्तरदायित्व बहुत जरूरी है।

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