Kashi Vidyapith: किसी को मिला सास का सपोर्ट, तो किसी ने मां के सपनों को किया साकार;मेधावियों ने ऐसे रचा इतिहास

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success story of meritorious students who won gold medal in Mahatma Gandhi Kashi Vidyapeeth

वाराणसी में राष्ट्रपति
– फोटो : संवाद

विस्तार


महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गोल्ड मेडल पाने वाले मेधावियों के चेहरे की चमक देखते ही बन रही थी। सफलता की नई इबारत गढ़ने निकले मेधावियों का कहना था कि लक्ष्य को साध लेने से सब कुछ सिद्ध हो सकता है। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है और यह आपका भविष्य बदल सकता है।

मां ने मेरे मन को पढ़ा, मैं मेडल ले आई

पापा बैंक में काम करते हैं। मां मनोविज्ञान से एमए की हैं और गृहणी हैं। लेकिन शिक्षकों के साथ ही मां ने मेरे मन को पढ़ा और शैक्षणिक मोटिवेशन करती रहीं। नतीजा, मैं एमबीए में टॉप कर गई। शिक्षक बनना है। इसकी तैयारी कर रही हूं। -सुनंदा यति

सास ने संभाला चूल्हा-चौका, बहू ने पाया मेडल

मेरी सास मुझे पढ़ने के लिए खुद चूल्हा-चौका संभालीं। अब मैं संस्कृत में अव्वल आई हूं। पति व्यापारी हैं, लेकिन ससुराल में सभी का बराबर सहयोग मिला। यही वजह है कि पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आई। मैं शिक्षक बनने की तैयारी कर रही हूं। -ट्विंकल पाठक

पिता हैं किसान, बेटे को मिला गोल्ड

पिता जी चंदौली में किसान हैं। गुरुजनों से अध्ययन की बारीकियां सीखने को मिली तो परिवार से मानसिक सबलता। अब आगे साफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता हूं। -विनय तिवारी

पिता ऑटो चालक, बेटा बना गोल्ड मेडलिस्ट

पिता मुंबई में ऑटो चालक हैं। चार-पांच महीने में एक बार घर आते हैं लेकिन पढ़ाई को लेकर रोजाना बात करते हैं। हिंदी में मुझे गोल्ड मिला और सिविल सेवा में जाने के लिए तैयारी कर रहा हूं। -अभिषेक मौर्या

मेडिकल में हारी, अर्थशास्त्र में पाया मेडल

मैं पहले मेडिकल की तैयारी की। असफल हुई तो फिर एमए में दाखिला ले लिया और अब अर्थशास्त्र में गोल्ड मेडल मिला है। माता-पिता शिक्षक हैं और बचपन से मां उनका मार्ग दर्शन मिला है। अब मेरा लक्ष्य सिविल सेवा में जाना है। प्रयागराज से सिविल सिर्विसेज की तैयारी रही हूं। -संसृता सिंह

कराते को सेल्फ डिफेंस के लिए सीखा फिर बना लिया कॅरियर

मैं कक्षा नौ में पढ़ाई के दौरान सेल्फ डिफेंस के लिए कराते सीख रही थी। फिर इसे कॅरियर बना लिया। पापा के देहांत के बाद मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रही हूं। साथ ही अभ्यास भी करती हूं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल लाने के लिए प्रयास कर रही हूं। -अंजलि पटेल

सिविल सेवक बनकर दादा की पूरा करनी है इच्छा

राष्ट्रपति के हाथों बीबीए में गोल्ड मेडल पाकर खुश हूं। दादा जी की प्रेरणा से दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी कर रही हूं। -सगुन सिंह

बहन के मेडल से प्रेरित अंजलि बनीं गोल्ड मेडलिस्ट

बड़ी बहन आकांक्षा ने बीएचयू में मेडल हासिल किया तो मैंने भी गोल्ड मेडल पाने की ठान ली। बहन से मार्ग दर्शन लेकर खूब मेहनत किया और समाज कार्य में गोल्ड पाया। अब मैं एलएलबी करके वकालत करना चाहती हूं। -अंजलि

अब शुरू करूंगी स्टार्टअप

राष्ट्रपति के हाथों मेडल पाकर अच्छा लग रहा है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि राष्ट्रपति के हाथों मुझे पदक मिलेगा। अब अगला लक्ष्य स्टार्टअप शुरू करना है। पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। – मनीषा मौर्या

पति शिक्षक अब मुझे भी बनना है

मेरे पिता प्रोफेसर व पति शिक्षक हैं। अब मैं भी शिक्षक बनना चाहती हैं। एमए इतिहास में विश्वविद्यालय में टाॅप करने में पूरे परिवार से सहयोग मिला। – प्रीतम प्रसाद

नैना को मिली दोहरी खुशी

मुझे दोहरी खुशी मिली है। मैंने हिंदी में गोल्ड पाया है और साथ ही मेरा बिहार शिक्षक में चयन भी हो गया है। पिता और दो भाई सेना में हैं। मेरा लक्ष्य भी सिविल सेवा में जाना है। -नैना

जज बनकर करना चाहती हूं समाज सेवा

मुझे एलएलबी में गोल्ड मिला मिला। मैंने समाज में अपना न्यायपूर्ण योगदान दे सकने के लिए इस क्षेत्र को चुना। फिलहाल मैं पीसीएसजे की तैयारी कर रही हूं। पिता रियल एस्टेट के क्षेत्र में काम करते हैं। – संजना उपाध्याय

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