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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
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लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन की सवारी सबसे मुफीद मानी जाती है। आम आदमी के लिए यह किसी लाइफ लाइन से कम नहीं है, पर मौजूदा हालात इससे अलग हैं। रेलवे का जोर यात्री सुविधाओं पर कम और कमाई पर ज्यादा है। ट्रेनों में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोच घटाकर एसी श्रेणी के कोच बढ़ाए जा रहे हैं। नतीजतन यात्रा महंगी हो गई है।
वहीं, एसी व जनरल श्रेणी के कोच में क्षमता से अधिक यात्री सफर कर रहे हैं। टिकट बुकिंग से लेकर रिफंड तक के लिए यात्रियों से कटौती की जा रही है। वेटिंग टिकट लेकर सफर करने वाले यात्रियों को दुर्दशा झेलनी पड़ती है, वहीं दूसरी ओर रेलवे अपनी तिजोरी भर रहा है।
रेलवे ने 22 कोच की ज्यादातर ट्रेनों में जनरल कोच की संख्या चार और छह से घटाकर दो कर दी है। कुछ ट्रेनों में तो एक ही जनरल कोच लगाया जा रहा है। मजबूरन जरनल श्रेणी के यात्रियों को स्लीपर कोच में सफर करना पड़ रहा है। एसी श्रेणी के कोचों की भी यही स्थिति है। इस कारण कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को परेशानी हो रही है।
ट्रेन के स्लीपर कोच में सीटों की संख्या 72 से 80 तक होती है। एसी कोच में सीटों की संख्या 42 से 48 के बीच होती है। जनरल कोच में 250-300 यात्री बैठ सकते हैं। इन दिनों ट्रेनों के जनरल कोचों में 500-600 और एक स्लीपर कोच में 250-300 यात्री सफर कर रहे हैं। जनरल श्रेणी के कोच घटाए जाने से यह समस्या बढ़ी है।
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