पुंछ: पहले 29 दिन में लिखी 25 किलो की कुरान शरीफ, अब पैदल हज यात्रा के लिए निकले

[ad_1]

Poonch

Poonch
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

पहले अपने हाथ से कुरान शरीफ लिखने की ख्वाहिश पूरी की और अब युवा मौलाना इस कुरान शरीफ के साथ पैदल हज यात्रा (उमरा) के लिए निकल पड़े हैं। पुंछ जिले की मंडी तहसील के दूर दराज गांव हड़ीबुड्डा निवासी मौलाना अब्दुल कयूम अशर्फी ने रमजान में 29 दिन के भीतर अपने हाथों से कुरान शरीफ लिख डाली। बेहद दिलचस्प है कि कुरान शरीफ का वजन 25 किलो है, जिसे लेकर कयूम मंडी से दिल्ली के लिए पैदल निकल पड़े हैं। वे जहां से भी गुजर रहे हैं, वहां कुरान शरीफ देखने वालों का तांता लग रहा है। 

कयूम का कहना है कि वह पाकिस्तान और ईरान के रास्ते से पूरा सफर पैदल करना चाहता था, लेकिन बाकी मुल्कों ने उसे वीजा देने से मना कर दिया। भारत में आपसी भाईचारा है और पैदल यात्रा में सभी से सहयोग मिल रहा है। पुंछ से दिल्ली के लिए 800 किलोमीटर से भी लंबा सफर वह पैदल तय करेंगे। दिल्ली तक पहुंचने में 45 दिन का समय लग सकते हैं, जहां से जेद्दा एयरपोर्ट के लिए उड़ान की योजना है। आगे का सफर पैदल तय कर वह कुरान शरीफ को मक्का स्थित लाइब्रेरी में भेंट करेंगे।

कयूम के साथ दो और लोग हैं। रविवार को मंडी स्थित जामा मसजिद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मौलाना अब्दुल कयूम अशर्फी के हाथों लिखी 25 किलो की कुरान को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। पहले कुरान शरीफ की झलक पाने की बेताबी दिखी और फिर सभी ने मिलकर कयूम के पैदल सफर की सफलता के लिए सामूहिक दुआ की गई। उन्हें माला पहना कर लोग कस्बे के बाहर तक छोड़ने आए। 
मौलाना अब्दुल कयूम ने कहा, चार वर्ष से इच्छा थी कि मैं पुंछ से मक्का मदीना तक की पैदल यात्रा करूं।

कई मुल्कों से वीजा लेने की कोशिश की लेकिन सभी ने नकार दिया। हिंदुस्तान में भाईचारा है, एकता है और पैदल यात्रा को बड़ा सम्मान मिलता है। लिहाजा पुंछ से दिल्ली तक पैदल यात्रा करने और वहां से जेद्दा तक हवाई जहाज से यात्रा करने की है। सबकुछ ठीक रहा तो जेद्दा से पैदल मक्का मदीना जाने की योजना है। वहां की लाइब्रेरी में कुरान शरीफ सौंपने की ख्वाहिश भी पूरी करना चाहता हूं।

विस्तार

पहले अपने हाथ से कुरान शरीफ लिखने की ख्वाहिश पूरी की और अब युवा मौलाना इस कुरान शरीफ के साथ पैदल हज यात्रा (उमरा) के लिए निकल पड़े हैं। पुंछ जिले की मंडी तहसील के दूर दराज गांव हड़ीबुड्डा निवासी मौलाना अब्दुल कयूम अशर्फी ने रमजान में 29 दिन के भीतर अपने हाथों से कुरान शरीफ लिख डाली। बेहद दिलचस्प है कि कुरान शरीफ का वजन 25 किलो है, जिसे लेकर कयूम मंडी से दिल्ली के लिए पैदल निकल पड़े हैं। वे जहां से भी गुजर रहे हैं, वहां कुरान शरीफ देखने वालों का तांता लग रहा है। 

कयूम का कहना है कि वह पाकिस्तान और ईरान के रास्ते से पूरा सफर पैदल करना चाहता था, लेकिन बाकी मुल्कों ने उसे वीजा देने से मना कर दिया। भारत में आपसी भाईचारा है और पैदल यात्रा में सभी से सहयोग मिल रहा है। पुंछ से दिल्ली के लिए 800 किलोमीटर से भी लंबा सफर वह पैदल तय करेंगे। दिल्ली तक पहुंचने में 45 दिन का समय लग सकते हैं, जहां से जेद्दा एयरपोर्ट के लिए उड़ान की योजना है। आगे का सफर पैदल तय कर वह कुरान शरीफ को मक्का स्थित लाइब्रेरी में भेंट करेंगे।

कयूम के साथ दो और लोग हैं। रविवार को मंडी स्थित जामा मसजिद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मौलाना अब्दुल कयूम अशर्फी के हाथों लिखी 25 किलो की कुरान को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। पहले कुरान शरीफ की झलक पाने की बेताबी दिखी और फिर सभी ने मिलकर कयूम के पैदल सफर की सफलता के लिए सामूहिक दुआ की गई। उन्हें माला पहना कर लोग कस्बे के बाहर तक छोड़ने आए। 

मौलाना अब्दुल कयूम ने कहा, चार वर्ष से इच्छा थी कि मैं पुंछ से मक्का मदीना तक की पैदल यात्रा करूं।

कई मुल्कों से वीजा लेने की कोशिश की लेकिन सभी ने नकार दिया। हिंदुस्तान में भाईचारा है, एकता है और पैदल यात्रा को बड़ा सम्मान मिलता है। लिहाजा पुंछ से दिल्ली तक पैदल यात्रा करने और वहां से जेद्दा तक हवाई जहाज से यात्रा करने की है। सबकुछ ठीक रहा तो जेद्दा से पैदल मक्का मदीना जाने की योजना है। वहां की लाइब्रेरी में कुरान शरीफ सौंपने की ख्वाहिश भी पूरी करना चाहता हूं।



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *