Ayodhya Ram Mandir: 84 सेकेंड में होगी रामलला मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, जानें इस शुभ मुहूर्त की खासियत

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होगी. अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगी. प्राण प्रतिष्ठा के लिए शुभ मुहूर्त का क्षण 84 सेकंड का मात्र होगा. इस दिन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट 08 सेकेंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकेंड का मुहूर्त काशी के वयोवृद्ध पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला है. ये मुहूर्त देश के लिये शुभ होगा. पांच दिनों की पूजा के बाद सिर्फ 84 सेकेंड के शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला को गर्भगृह में स्थापित करेंगे. ज्योतिषाचार्य के अनुसार ‘प्रतितिष्ठत परमेश्वर’ इस मंत्र का मतलब है, परमेश्वर आप विराजमान हो.सनातन धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘धर्म सिंधु’ में देव विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा के लिए इस मंत्र को सर्वोत्तम बताया गया है.

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने दिए थे कई विकल्प

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला की स्थापना के लिए कई तारीखों के विकल्प दिए थे. बताया जा रहा है कि 17 जनवरी से 25 जनवरी तक के 5 तारीख दिए गए थे, लेकिन काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने 22 जनवरी तारीख और एक मुहूर्त चुना है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार 22 जनवरी मुहूर्त के लिहाज से कई वाणों से दोष मुक्त है. यह तारीख और यह मुहूर्त अग्निबाण मृत्युबाण, चोरवाण, नृपवाण और रोगवान से मुक्त है.

अति दुर्लभ है योग

22 जनवरी 2024 को दोपहर 12 बजे के करीब जिस मुहूर्त में रामलला विराजमान होंगे, वह मुहूर्त भी काफी दुर्लभ है और कई सालों बाद ऐसे मुहूर्त मिलते है. खास बात यह है कि इस मुहूर्त में नौ ग्रहों में से छह ग्रह एक साथ होंगे. गुरु ग्रह की पूरी दृष्टि इस दौरान पांचवे, सातवें और नौवे स्थान पर होगी.

भारत के उन्नति का कारक

ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस मुहूर्त की एक विशेषता यह भी यह कि इस समय दोष उत्पन्न करने वाले पांच बाण यानी रोग बाण, चोर बाण, मृत्यु बाण, अग्नि बाण और राज बाण कोई भी नहीं होगा. बल्कि अभिजीत मुहूर्त में रामलला वहां विराजमान होंगे जो भारत के उन्नति का कारक होगा.

बुध-शुक्र सभी दोषों का करेंगे निवारण

ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक इस शुभ योग में बुध और शुक्र 9 वें स्थान पर विराजमान है. 9 वें घर का बुध सभी दोषों को दूर करते है, इसके अलावा शुक्र भी उन दोषों का निवारण कर देते है, इसलिए मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के इस मुहूर्त को धर्म शास्त्र और ज्योतिषशास्त्र के दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है.

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