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तपोवन विधानसभा भवन
– फोटो : सोशल मीडिया
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अपनी गाड़ियों में झंडियों को बहाल करवाने को लेकर सदन में विधायक एकमत हुए। उन्होंने मुद्दा उठाया कि अफसरों की गाड़ियों में झंडियां लगीं हैं तो उनके वाहनों में क्यों नहीं लग रहीं, जबकि प्रोटोकॉल मुख्य सचिव से ऊपर का है। शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस पर कहा कि कई पहलुओं को देखने के बाद इसके बारे में विचार किया जाएगा। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा है कि विधायकों की गाड़ियों के चालान काटे जा रहे हैं। वह इस सदन के माध्यम से इस विषय को लाना चाहते हैं। प्रोटोकॉल में विधायक सबसे ऊपर हैं, लेकिन विधायकों को रोका जाता है। कागज दिखाने के लिए एक एसएचओ विधायक को रोक लेता है। कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि अधिकारियों की गाड़ियों में जो फ्लैग लग रहे हैं, वे किस अधिनियम के अंदर लग रहे हैं। अगर इतनी बड़ी त्रासदी हुई और इसमें कोई पहुंचा सिर्फ विधायक। वह इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं।
विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि यह मामला कोई नया नहीं है। अधिकारियों की ओर से फ्लैग मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नहीं लगाए जा रहे हैं। कैबिनेट सब कमेटी ने प्रावधान किया। अगर विधायक झंडी नहीं लगा सकते तो सबकी उखाड़ी जाएं। भाजपा विधायक विनोद कुमार ने भी झंडी लगाने का समर्थन किया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया बोले कि 16 मार्च को उनकी अध्यक्षता में एक बैठक हुई, उसमें भी इस पर निर्णय लिया गया। अब केवल प्राधिकार आना है। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। यह मुद्दा तीन-चार साल से लटका है। यह प्रश्न है कि 2021 में जब संशोधन हुआ तो इसे लागू क्यों नहीं किया गया।
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