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शक्कर
– फोटो : अमर उजाला
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सूबे के आंगनबाड़ी केंद्रों में चीनी की जगह अब शक्कर मिलेगी। पहली बार ट्रायल आधार पर इसकी शुरूआत हुई है। पोषण तत्वों से लबरेज शक्कर नौनिहालों के खाने में शामिल करने के पीछे का कारण भी पौष्टिक आहार देना है। ट्रायल सफल रहा तो स्थायी तौर पर शक्कर ही आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलेगी। नौनिहालों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषक तत्वों पर आधारित भोजन दिया जाता है।
अब इसमें हल्का बदलाव किया गया है। चीनी की जगह चक्कर को शामिल किया गया है। सूबे के 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों में लाखों नौनिहालों को यह शक्कर खेप भेज दी गई है। मुख्य तौर पर दलिया में चीनी की जगह शक्कर का इस्तेमाल होगा। सर्दियों के लिए शक्कर गुणकारी मानी जाती है। मंडी जिला की बात करें तो यहां 3004 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए करीब 186 क्विंटल शक्कर खेप मिली है। इसमें से 180 क्विंटल खेप फील्ड को भेज दी गई है।
उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय बदरेल ने बताया कि आंगनबाड़ी में चीनी की जगह शक्कर ट्रायल आधार पर इस्तेमाल में लाई जाएगी। इसके लिए शक्कर खेप मिल गई है। जिसे फील्ड के लिए भेजा गया है। निदेशालय स्तर से ही बदलाव हुआ है। वहीं, आयुर्वेदिक अस्पताल मंडी में तैनात डा. हितेश के अनुसार आयुर्वेद में नौनिहालों को शक्कर सेवन के कई फायदे हैं। संतुलित व सही मात्रा में सेवन करना कई तरह से लाभ पहुंचाता है।
शक्कर खाने के फायदे
आयुर्वेद के अनुसार बच्चों को शक्कर का संतुलित और मात्रा में सेवन करने से कई फायदे हो सकते हैं। यह ऊर्जा प्रदान करता है। संतुलित सेवन मस्तिष्क की क्रियाशीलता को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। जिससे बच्चों का मानसिक समर्थन बढ़ सकता है।
शक्कर को संतुलित रूप से आहार में शामिल करने से बच्चों का भोजन संतुलित होता है और उन्हें आवश्यक पोषण मिलता है। छोटी मात्रा में शक्कर का सेवन पाचन शक्ति को उत्तेजित कर सकता है, जिससे खाद्य सामग्री को ठीक से पचा जा सकता है। बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
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