अनुच्छेद 370: अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस SC में समीक्षा याचिका दायर करने पर कर रही विचार, चर्चा के बाद होगा फैसला

[ad_1]

Article 370 Awami National Conference and other kashmir parties may file review petition supreme court

अनुच्छेद 370
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक ने गुरुवार को कहा कि अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एएनसी) अदालत के समक्ष समीक्षा याचिका दायर करने पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में खामियां हैं।

एएनसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह ने कहा कि उनकी पार्टी को कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला खामियों से भरा था। यह कई बुनियादी मुद्दों पर चुप रहा। एक समीक्षा याचिका तैयार की जा रही है और एक बार यह तैयार हो जाने पर, हम इसे अपनी कानूनी टीमों और 23 याचिकाकर्ताओं के सामने रखेंगे और फिर शीर्ष अदालत में फिर याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह चर्चा का विषय है कि कानूनी कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।

उन्होंने कहा, ‘एक बात तो तय है कि चूंकि कानूनी और संवैधानिक जानकारों के मुताबिक फैसला खामियों से भरा है, इसलिए हम फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। क्या समीक्षा याचिका दायर की जाएगी या कोई और रास्ता अपनाया जाएगा, हम इस पर चर्चा करेंगे।’

एएनसी नेता ने उम्मीद जताई कि जो लोग इतिहास और संविधान में विश्वास करते हैं वे इस कानूनी लड़ाई में एक साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि हमें यह भी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 को बहाल करेगा।

शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) की अगली बैठक में भी चर्चा की जाएगी, जिसका गठन 2019 में जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति की बहाली के लिए लड़ने के लिए किया गया था।

केंद्र ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में इस फैसले को बरकरार रखा।

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘मैं फैसले का जश्न मनाने और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इसका इस्तेमाल करने वालों को बताना चाहता हूं कि मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर के लोग आपको करारा जवाब देंगे कि उन्होंने 5 अगस्त, 2019 के फैसले को स्वीकार नहीं किया है।’

पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की हिरासत में कथित तौर पर मारे गए तीन नागरिकों पर शाह ने कहा कि अत्याचार और हत्याओं में शामिल सेना के जवानों को कोर्ट-मार्शल किया जाना चाहिए।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *