[ad_1]
इससे पहले शासन से परिवहन संघों की वार्ता बेनतीजा रहने से संकट गहरा गया था। रोडवेज सहित कुछ संगठन तो मान गए थे लेकिन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने बुधवार को चक्काजाम को समर्थन का एलान कर दिया था। सचिव परिवहन अरविंद सिंह ह्यांकी ने परिवहन संघों की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने बताया कि मोटर दुर्घटना में कानून में जिस सजा के विरोध में हड़ताल हो रही है, इसकी न तो अधिसूचना जारी हुई है और न ही वह लागू हुआ है।
उन्होंने परिवहन संघों के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपनी बात कानून सम्मत तरीके से पहुंचाएं, जिसे केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा। परिवहन व्यावसाय जनसरोकारों से जुड़ा हुआ है, जिससे न केवल आमजन को परेशानी होती है बल्कि आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
परिवहन संघों का कहना था कि इस कानून में 10 साल की सजा 5 लाख अर्थदंड का प्रावधान किया गया है, जो न्यायसंगत नहीं है। कोई भी चालक जानबूझकर दुर्घटना नहीं करता। उन्होंने ये भी कहा कि दुर्घटनाएं खराब सड़क, चौहारों का उपयुक्त न होना, निजी वाहन चालकों के अप्रशिक्षित होने की वजह से भी होती हैं। इस बात पर चिंता भी जताई कि अगर कोई चालक दुर्घटना के बाद वहीं रुकेगा तो भीड़ की हिंसा का शिकार हो सकता है। बैठक में परिवहन निगम कर्मचारी परिषद ने संचालन को हामी भर दी थी।
कुछ विक्रम, सिटी बस, ऑटो चालक भी तैयार हुए लेकिन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने इनकार कर दिया था। संगठन के प्रदेश महासचिव आदेश सैनी सम्राट ने कहा कि बुधवार को होने वाले चक्काजाम में सभी संगठन शामिल होंगे। हालांकि देर शाम हड़ताल खत्म करने का एलान कर दिया गया था।
बैठक बेनतीजा रहने के बाद सचिव परिवहन अरविंद सिंह ह्यांकी ने सभी जिलों के डीएम, एसएसपी को आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही संचालन करने वालों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के भी निर्देश दे दिए थे। साथ ही ये भी कहा कि जो संचालन में बाधा उत्पन्न करेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, अब ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एपी उनियाल ने कहा कि हमें सिर्फ नेतृत्व से हड़ताल खत्म करने का संदेश मिल गया है। हम सभी संगठनों और चालकों से अपील करते हैं कि वह अपने काम पर लौट जाए। बुधवार को इस संबंध में एक बैठक भी बुलाई गई है। सरकार ने जो आश्वासन दिए हैं, उसके आधार पर हड़ताल खत्म हुई है। अगर सरकार अपने वादे से मुकर गई तो दोबारा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
[ad_2]
Source link