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AIIMS Gorakhpur
– फोटो : अमर उजाला
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एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ सुरेखा किशोर ने एक जून 2020 को ज्वाइन किया। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का था, लेकिन एक साल के भीतर उनके खिलाफ बगावत का बिगुल बजने लगा। अनियमितताओं की शिकायत बीते दो साल से हो रही थी। एम्स में कार्यकारी निदेशक पद पर डॉ. सुरेखा किशोर ने पांच साल पूरे होने से पहले ही उनका काम तमाम कर दिया गया।
एम्स में डॉक्टरों व कर्मचारियों का एक धड़ा ही विरोध में नहीं था, बल्कि एम्स की गवर्निंग बॉडी के लोग भी असंतुष्ट थे। सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) ने अपनी जांच रिपोर्ट में 15 गवाहों के बयान दर्ज किए और साक्ष्य के तौर पर पुख्ता सबूत जुटाए। इसके बाद 15 दिनों की मोहलत देकर डॉ सुरेखा किशोर से जवाब तलब किया।
सबसे पहला विरोध उत्तराखंड के एक डॉक्टर के चयन पर हुआ। इसमें आरोप लगा कि उक्त डॉक्टर ने फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर मेरिट में जगह बनाई। उसकी भी जांच चल रही है। इस मामले में भी एम्स की कार्यकारी निदेशक घिर गईं। मामले की शिकायत दिल्ली तक पहुंच गई। यहीं से डॉक्टरों के एक गुट ने उनसे दूरी बना ली और अनियमितता की शिकायत की।
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