Shimla: गवास गांव में 38 साल बाद शांत महायज्ञ, देवताओं और खूंदों की मौजूदगी में निभाई फेरी-शिखा पूजन की रस्म

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After 38 years a shant Mahayagya performed in Gavas village Rohru in the presence of Gods, Goddesses and thous

देवताओं और खूंदों की मौजूदगी में निभाई फेरी-शिखा पूजन की रस्म
– फोटो : संवाद

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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू के गवास गांव में देवता गुडारू महाराज के सानिध्य में 38 साल बाद ऐतिहासिक देव अनुष्ठान शांत महायज्ञ गवास समारोह आयोजित किया जा रहा है। तीन दिन तक चलने वाले इस ऐतिहासिक महायज्ञ में 12 से अधिक देवी-देवता और 20 हजार से अधिक देवलु एवं खूंद पहुंचे हैं। प्रचलित पंरपरा के मुताबिक इस ऐतिहासिक देव अनुष्ठान के सफल आयोजन से क्षेत्र मे सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। प्रचलित दैविक कार एवं आदेशों के तहत देव आगमन (संगेडा) के साथ शांत महायज्ञ विधिवत रूप से शुरू हुआ। आयोजन के दूसरे दिन सोमवार को फेरी व शिखा पूजन की परंपरा पूरी की गई। फेरी रोहटान खूंद की की ओर से सुबह 9:00 बजे मंदिर की परिक्रमा करके की गई। शिखा रस्म दोपहर 1:00 बजे मंदिर के छत पर पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

अंतिम और तीसरे दिन मंगलवार को देवताओं एवं खूंदों की विदाई (उछड़-पाछड़) के साथ यह देव सामारोह संपन्न हो जाएगा। इस शांत महायज्ञ समारोह में देवता गुडारू गवास, जिगाह नाली के प्रमुख देवता जाबल नारायण, देवता गुडारू डिस्वाणी, देवता गुडारू थली, देवता गुडारू छुपाडी, देवता पवासी भौलाड, बोठा महासू अस्ताणी, पवासी भटवाडी, सेखल रोहटाण खूंद बतौर मेहमान शिरकत कर रहे हैं। परशुराम धगोली, गुम्मा, नंडला, चिउणी व खंशकडी परशुराम अपने खूंद एवं कर्मकांड में निपुण ब्राह्मणों की टोली के साथ विशेष रूप से शामिल होकर इस देव अनुष्ठान को विधिवित रूप से संपन्न करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। देवता के साथ सदियों से गौशटण (दोस्त) के रूप मे ऐतिहासिक संबध बनाए रखे हुए अढाल गांव से पांचटा परिवार बतौर विशिष्ट मेहमान शिरकत कर रहे हैं। 

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