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कारसेवक राकेश कुमार
– फोटो : अमर उजाला
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विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल मेरे सामने ही घायल हुए थे। कारसेवकों के साथ मैं हनुमानगढ़ी के पास बैठा था, तभी वहां से उनका काफिला गुजरा तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। आंसूगैस के गोले भी छोड़े। सिर में लाठी लगने से अशोक सिंघल घायल हो गए पर कारसेवकों का जुनून कम न हुआ। पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर जत्था श्रीराम जन्मभूमि की ओर अग्रसर हुआ था। बरेली के अलीगंज गांव के 60 वर्षीय राकेश कुमार ने ये बातें बताईं।
उन्होंने कहा कि 30 अक्तूबर 1990 को वह कारसेवा के लिए अयोध्या में मौजूद थे। उस दिन सुबह अयोध्या डर, आशंका और अनिश्चितता की गिरफ्त में थी। सड़कों पर अर्द्धसैनिक बलों का पहरा था। पिछले चार दिनों से अयोध्या में कर्फ्यू लगा था। जन्मभूमि के दर्शन पर रोक नहीं थी, पर वहां किसी को जाने भी नहीं दिया जा रहा था।
सुबह से ही कारसेवकों ने चारों ओर से दबाव बनाकर श्रीराम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ना शुरू कर दिया था। हनुमानगढ़ी चौराहे पर मौजूद फोर्स ने उनको खदेड़ दिया। कुछ कारसेवक गिरफ्तार भी हुए थे। इसके बाद हम लोग हनुमानगढ़ी के सामने आकर बैठ गए थे। हमारे जत्थे का नेतृत्व आंध्र प्रदेश के विधायक के. नरेंद्र कर रहे थे। कुछ ही देर में अशोक सिंघल के नेतृत्व में दूसरा जत्था वहां पहुंचा तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। अशोक सिंघल सहित कई कारसेवक घायल हो गए थे।
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