UP: भारत की सभी जातियों में मिला रामायण वाली जनजातियों का DNA; बीएचयू सहित कई संस्थानों के विज्ञानी कर रहे शोध

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DNA of Ramayana tribes found in all castes of India BHU and IIT Scientists research

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– फोटो : अमर उजाला

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देशभर के जीन विज्ञानी रामायण से जुड़े किरदारों के वैज्ञानिक आधार का पता लगाने में जुटे हैं। 200 लोगों के ब्लड सैंपल की जांच से पता चला कि रामायणकालीन जनजातियों का डीएनए भारत की सभी जातियों, जनजातियों में पाया जाता है। इस शोध से बीएचयू में जूलॉजी डिपार्टमेंट के जीन विज्ञानी प्रो ज्ञानेश्वर चौबे भी जुड़े हैं। उनका कहना है कि शोध में शबरी, निषादराज, कोल, भील और गोंड सहित अन्य किरदारों को शामिल किया गया है। शोध लंबा चलेगा।

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मद्देनजर रामायण, राममंदिर में लगने वाली मूर्तियों सहित अन्य विषय वस्तुओं पर अध्ययन हो रहे हैं। इस बीच जनजातियों पर होने वाला अध्ययन भी प्रासंगिक हो गया है। बीएचयू के जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक 2013 से चल रहे शोध में नई जानकारियां मिलती जा रही हैं। रामायण में वर्णित श्री रामवन गमन के रास्तों के आसपास से तीन प्रमुख जनजातियों(कोल, भील, गोंड) के 200 से ज्यादा लोगों के खून के नमूने एकत्रित किए गए। इसमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और तेलंगाना राज्य के लोगों को शामिल किया गया।

जिन लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया, उनके जेनोमिक डेटा को भारत के साथ विश्व के 10,000 से ज्यादा नमूनों के साथ मिलान किया गया। विज्ञान की भाषा में कहें तो विभिन्न स्टैटिस्टिकल जैसे की ऐडमिक्सचर और प्रिंसिपल कंपोनेंट एनालिसिस किया गया। इसके बाद पता चला कि संपूर्ण भारत की जातियां और जनजातियां एक ही क्लाइन या साधारण शब्दों में समझें तो एक ही अक्षीय लाइन पर अपने जियोग्राफी के अनुसार साथ हो रही थी। कोल, भील और गोंड भी इनके ही बीच में आ रहे थे। इससे यह पता चलता है कि इन सभी के आधार एक ही हैं।

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