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रामपुर की रजा लाइब्रेरी में रखी रामायण
– फोटो : संवाद
विस्तार
रामोत्सव के उपलक्ष्य में रजा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम में भगवान श्रीराम से जुड़े संग्रहों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें 1825 ईसवी में लेखक अहमद खां गफलत द्वारा लिखी गई किस्सा-ए-राम सीता पुस्तक की पांडुलिपि लोगों को आकर्षित कर रही है। अहमद खां ने इसे उर्दू में लिखा है। काफी संख्या में लाइब्रेरी में पहुंच रहे लोग इसकी सराहना कर रहे हैं।
रजा लाइब्रेरी ज्ञान का खजाना है। यहां पर श्रीराम से जुड़े संग्रहों के साथ ही पवित्र कुरान भी है। यहां तुर्की, फारसी, उर्दू व संस्कृत में अनुवादित करीब 17 हजार से ज्यादा पांडुलिपियां हैं। रामोत्सव के उपलक्ष्य में लगी प्रदर्शनी में वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस, फारसी व उर्दू में अनुवादित रामायण भी रखी गई हैं।
यहां पर 199 साल पहले अहमद खां गफलत द्वारा लिखी गई 97 पेज की पांडुलिपि किस्सा-ए-राम सीता भी रखी है। उर्दू में लिखी गई इस पुस्तक में भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े तमाम किस्से लिखे गए हैं। ये किस्से उर्दू में नस्तालीक लिपि में लिखे गए हैं।
18वीं सदी में लिखी गई थी रामलीला
18वीं शताब्दी में लेखक घासीराम ने रामलीला के नाम से पुस्तक लिखी थी। नस्तालीक लिपि में लिखी गई इस पुस्तक में रामलीला का लघु तरीके से वर्णन किया गया है। 16 पेज में लिखी गई इस पुस्तक में काफी रोचक जानकारियां दी गई हैं। प्रदर्शनी में ये पुस्तक भी लोगों को पसंद आ रही है।
रजा लाइब्रेरी के संग्रहालय में पवित्र रामायण व श्रीराम से जुड़े संग्रहों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें प्रदर्शित पांडुलिपियों और पुस्तकों के जरिये लोग अपना ज्ञानवर्धन कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनी में श्रीराम से जुड़े अन्य संग्रह भी लगाए गए हैं। यह प्रदर्शनी 28 जनवरी तक चलेगी। – अबु साद इस्लाही, लाइब्रेरियन, रजा लाइब्रेरी
छुट्टी के दिन प्रदर्शनी देखने वालों की रही भीड़
रविवार की छुट्टी होने की वजह से रजा लाइब्रेरी में लगी प्रदर्शनी को देखने के लिए तमाम लोग यहां पहुंचे। सुबह से ही प्रदर्शनी में भीड़ नजर आने लगी। यहां पर इस प्रदर्शनी को देखने वालों की संख्या करीब दो हजार पार कर गई है। 28 जनवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी को लेकर युवाओं व छात्रों में काफी उत्साह नजर आ रहा है। यह प्रदर्शनी सुबह 10.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक लगाई जा रही है।
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