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भगवान श्रीराम की लीलाओं से जुड़ी दुनिया की सबसे प्राचीन नृत्य नाटिका रम्माण चमोली जिले के लोगों के हृदय में रचा-बसा है। यूनेस्को की ओर से रम्माण को विश्व धरोहर वर्ड हेरिटेज घोषित किया गया है। राम कथा से जुड़ी नृत्य नाटिका रम्माण चमोली जिले के सलूड डुंग्रा गांव में प्राचीन काल से निरंतर आयोजित हो रहा है।
इसमें रामायण के प्रसंगों को लोक शैली में प्रस्तुत किया जाता है। भगवान राम की लीलाओं के कारण रम्माण भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
रम्माण को विश्व धरोहर तक की यात्रा में शामिल करने वाले सलूडडुंग्रा रहने वाले और वरिष्ठ शिक्षक डॉ. कुशल भंडारी कहते हैं कि रम्माण भगवान राम के जीवन से जुड़ी कथा का आत्मीय रिश्ता है। उत्तराखंड की संस्कृति के जानकार व लेखक संजय चौहान कहते हैं कि रम्माण का सांस्कृतिक विरासत का इतिहास 5 वीं सदी पुराना है।
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यह मुखौटा नृत्य है और इसे 2 अक्तूबर 2009 को विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया। रम्माण को विश्व धरोहर बनाने में डॉ. कुशलसिंह भंडारी, प्रो. डीआर पुरोहित पूर्व निदेशक गढ़वाल विवि सहित विभिन्न लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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