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सांबा में बैठक करते स्थानीय लोग
– फोटो : संवाद
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हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बाद जम्मू-कश्मीर के सांबा में एक ईंट शहीदों के नाम अभियान चलाया जाएगा। सांबा की मंडियों में सामाजिक संस्था की ओर से सोमवार को बैठक कर इसकी जानकारी दी। इसमें शहीदों के स्मारक बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया गया।
कर्त्तव्य निष्ठ संस्था के सदस्य संजीव राणा ने कहा कि अभियान के तहत स्थानीय लोगों की मदद से शहीद सैनिकों की याद में स्मारक बनाया जाएगा। इससे पहले एक ईंट शहीदों के नाम अभियान के तहत सरकार की आर्थिक मदद के बिना लोगों के सहयोग से हरियाणा में दो स्मारकों का निर्माण कराया गया।
यहां एक स्मारक में अखाड़ा व दूसरे में पार्क बनाया गया। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में भव्य शहीदी स्मारक बनाया गया। इस तरह शहीद स्मारक सिर्फ स्मारक तक ही नहीं, बल्कि नौजवानों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन रहे हैं। वहां स्मारक के साथ-साथ नौजवानों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए भी केंद्र बनाए जा रहे हैं।
इस संबंध में अभियान के संयोजक संजीव राणा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के सांबा में अब एक ईंट शहीदों के नाम अभियान के तहत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए सांबा में सभी पदाधिकारियों के साथ बैठक करके कार्यक्रमों के आगे की रूपरेखा तैयार की गई है।
सरहदों पर सैनिक हर विपरीत परिस्थिति को झेलते हुए देश की रक्षा करते हैं। इसलिए आम लोग देश में चैन से सो पाते हैं। देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों के लिए सरकार का ही दायित्व नहीं बनता बल्कि हर व्यक्ति को उनका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम सभी को शहीद स्मारक के लिए भी अपना-अपना सहयोग देना चाहिए। बैठक में सरपंच व सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हरदयाल सिंह, सेवानिवृत्त जेडईओ शिव चरण सिंह, मोहन सिंह लंबरदार, नेक सिंह, भूरी सिंह व राजेश सिंह उपस्थित थे।
शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में होंगे कार्यक्रम
अभियान के दौरान शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में भी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। संजीव राणा ने कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह के बारे में हम में से बहुत ही कम लोग जानते होंगे, क्योंकि वह सेना के उन वीर अफसरों में से एक थे।
जिन्होंने अक्तूबर 1947 में सेना के लिए लड़ते हुए जान की कुर्बानी दी थी। वह राज्य बल के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में से एक थे, जिन्हें बर्मा ऑपरेशन के दौरान सेवाओं के लिए ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एंपायर से भी सम्मानित किया गया।
कम संख्या में होने के बावजूद विद्रोहियों को दो दिन तक रोके रखा
अक्तूबर 1947 आते-आते कश्मीर की फिजा इतनी जहरीली हो गई थी कि जब पाकिस्तान ने मजहबी नारों के साथ जम्मू-कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया था। उस समय रियासती सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह को उनके मुस्लिम सैनिकों ने मजहबी उन्माद में अन्य हिंदू सैनिकों के साथ निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया। पाकिस्तानी इस्लामी आक्रमणकारियों से जा मिले थे। उनकी बटालियन के सैनिकों का ही काम था, जिन्होंने कम संख्या में होने के बावजूद विद्रोहियों को दो दिन तक रोक कर रखा था।
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