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Mahatma Gandhi Death anniversary
– फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि रामपुर में भी है। 11 फरवरी 1948 को बापू की अस्थियां रामपुर लाई गई थीं। कुछ अस्थियों को कोसी नदी में विसर्जित कर दिया गया था। शेष अस्थियों को चांदी के कलश में रखकर दफन किया गया था और वहीं पर गांधी समाधि का निर्माण कराया गया।
महात्मा गांधी दो बार रामपुर आए थे। 30 जनवरी 1948 को जब बापू की हत्या की खबर रामपुर पहुंची तो शोक की लहर दौड़ गई। उस वक्त रामपुर रियासत का भारतीय गणराज्य में विलय नहीं हुआ था। 31 जनवरी 1948 को रामपुर के नवाब रजा अली खां ने 13 दिन के सरकारी शोक का एलान किया था।
दो फरवरी को जब बापू का दिल्ली में अंतिम संस्कार हुआ तो रामपुर के किले से उनको 23 तोपों की सलामी दी गई थी। 10 फरवरी को नवाब दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी की चिता वेदी पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद नवाब रजा अली खां ने बापू की अस्थियों को रामपुर ले जाने की इच्छा जताई।
अस्थियों को लाने के लिए रामपुर से अष्टधातु का कलश ले जाया गया था। 11 फरवरी को सुबह 9 बजे नवाब की स्पेशल ट्रेन से अस्थि कलश को रामपुर लाया गया। हजारों की भीड़ स्टेशन पर मौजूद थी। शांति मार्च के रूप में अस्थि कलश को स्टेशन से स्टेडियम लाया गया, जहां शहरवासियों ने बापू को श्रद्धांजलि दी।
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