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मथुरा। राजकीय संग्रहालय में प्रदर्शित की गई कलाकृतियां।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मथुरा में ब्रज के पुरातन इतिहास और संस्कृति को सहेजकर रखने वाले राजकीय संग्रहालय में एक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित होगी। इससे एक क्लिक पर संग्रहालय में रखी सभी मूर्तियों और कलाकृतियों के बारे में टेक्स्ट या फोटो-वीडियो के रूप पूरी जानकारी मिल सकेगी।
सन 1874 ई में अंग्रेज कलेक्टर एफएस ग्राउज ने राजकीय संग्रहालय की स्थापना की थी। मथुरा का राजकीय संग्रहालय पुरातत्व, इतिहास, संस्कृति और शोध की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है, जहां पर्यटकों के अलावा देश-विदेश से शोधार्थी आते रहते हैं। खासकर बौद्ध धर्म को मानने वाले चीन, जापान, थाईलैंड और कोरिया आदि देशों से लोग मथुरा राजकीय संग्रहालय पहुंचते हैं।
हालांकि अपने महत्व के सापेक्ष यहां आने वाले लोगों की संख्या कम ही रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण इतने विशाल और अति महत्वपूर्ण पुरातात्विक संपदा की पूरी जानकारी देने के लिए कोई गाइड नहीं रहता। विभागीय कर्मचारी ही थोड़ी बहुत जानकारी पर्यटकों को देते हैं, जो नाकाफी होती है।
अब इस समस्या के समाधान के लिए संग्रहालय में एक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी। इसमें संग्रहालय में आने वाले पर्यटक डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से डिस्प्ले की गई किसी भी मूर्ति या कलाकृति के बारे में सारी जानकारी ले सकेंगे। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया। शासन से एजेंसी निर्धारित होने के बाद कार्ययोजना की डीपीआर बनेगी और मैटर के साथ फोटो-वीडियो अपलोड कराए जाएंगे।
ये है राजकीय संग्रहालय का संग्रह
- पत्थर की मूर्तियां – 5058
- मृण मूर्तियां – 2797
- कांस्य मूर्तियां – 350
- बर्तन – 292
- प्राचीन पेंटिंग्स – 415
- आभूषण – 32
- सौंख टील से निकली मूर्तियां व सिक्के-12,000
राजकीय संग्रहालय से यहां गईं कलाकृतियां
मथुरा राजकीय संग्रहालय की पुरातात्विक संपदा देश के कई संग्रहालयों में बंट चुकी है। यहां की सामग्री लखनऊ के राज्य संग्रहालय, कोलकाता के भारतीय संग्रहालय, मुंबई और वाराणसी संग्रहालयों में भेजी गई। विदेशों में भी मुख्यत: अमेरिका के बोस्टन संग्रहालय, पेरिस और ज्युरिख के संग्रहालयों और लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में प्रदर्शित हैं। जबकि इसका सबसे बड़ा भाग मथुरा संग्रहालय में सुरक्षित है।
राजकीय संग्रहालय में डिजिटल लाइब्रेरी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासनस्तर पर कार्यदायी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया की जा रही है। -योगेश यादव, उपनिदेशक, राजकीय संग्रहालय
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