[ad_1]

अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने से दशकों से चली आ रहीं कुरीतियां और कुप्रथाएं खत्म होंगी। सभी को एक समान अधिकार मिल सकेगा। बेटा-बेटी और स्त्री-पुरुष के बीच का भेदभाव खत्म होगा।
यह कहना है कि समान नागरिक संहिता की कानूनी जंग लड़ने वाले अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय का। सीएम आवास में यूसीसी की विशेषज्ञ समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंपने के दौरान उपाध्याय ने मीडिया से समान नागरिक संहिता की विशेषताओं और उनके संभावित प्रावधानों को साझा किया। कहा, समिति ने यूसीसी का ड्राफ्ट सौंप दिया है।
कहा, सरकार ड्राफ्ट का परीक्षण करेगी। उत्तराखंड में यह ऐतिहासिक काम होगा। यह देश के लिए नजीर बनेगा। संविधान निर्माता यही चाहते थे।भारतीय संस्कृति महिला-पुरुष के भेदभाव का विरोध करती है। दुर्भाग्यवश भारत में आज भी बहुत सारी कुरीतियां जारी हैं। कुछ कुप्रथाओं के खिलाफ कानून बनें, लेकिन अब भी समाज कई ऐसी कुरीतियां विद्यमान हैं, जिन्हें खत्म करने की जरूरत है।
[ad_2]
Source link