लद्दाख को पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग: हल न निकला तो 19 फरवरी से आमरण अनशन शुरू करेंगे सोनम वांगचुक

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Sonam Wangchuk to launch fast unto death from Feb 19 for constitutional safeguards for Ladakh

सोनम वांगचुक
– फोटो : सोशल मीडिया

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लद्दाख के लिए सांविधानिक सुरक्षा उपायों के प्रमुख सोनम वांगचुक ने 19 फरवरी से आमरण अनशन शुरू करने का एलान किया है। वांगचुक ने कहा कि कहा कि छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों और लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने से लोगों में निराशा बढ़ रही है। 

आमरण अनशन थुपस्तान छेवांग (पूर्व भाजपा लोकसभा सीट) से शुरू होगा। अगर वह नहीं रहे तो आंदोलन का नेतृत्व कौन करेगा इसके लिए रोस्टर तैयार किया जा रहा है। वह पहले 3 फरवरी से तीन सप्ताह के उपवास पर जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के अध्यक्ष छेवांग ने उन्हें 19 फरवरी तक इंतजार करने के लिए कहा है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात के बाद भी अगर एपेक्स बॉडी मांग पूरी नहीं करवा पाई तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार लद्दाख में शनिवार को एक बड़ी विरोध रैली भी गई थी और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के चार सूत्रीय एजेंडे के समर्थन में केंद्र शासित प्रदेश ने पूर्ण बंद रखा गया था। इस रैली में 30,000 लोग पहुंचे जो लद्दाख के इतिहास में अभूतपूर्व है। 

वांगचुक ने कहा कि यह भीड़ बेचैनी का नतीजा है क्योंकि कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। केडीए लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहा है। वांगचुक ने कहा कि लोगों में हताशा यह कहने पर मजबूर कर रही है कि उनके लिए पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के साथ रहना बेहतर है। 

उन्हें नहीं लगता कि लोग वास्तव में ऐसी स्थिति में रहना चाहते हैं जहां उनकी विशिष्ट पर्यावरणीय स्थितियां मेल नहीं खाती हों। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की अपनी विधायिका होनी चाहिए। रणनीतिक रूप से भी इस क्षेत्र के लिए अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों का होना महत्वपूर्ण है। चीन मानचित्रों में लद्दाख को अपना दिखाता है। 

अब, यदि भारत हां कहता है, तो यह विवादित है। हम इसे लोकतंत्र के बिना रख रहे हैं। चीन को यह कहने में खुशी होगी कि हां, यह हमारा था। 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को बिना किसी विधायिका के केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया और यह एक लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शासित है।

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