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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
ये तीन केस बानगी हैं कि कैसे पर्याप्त समय न दे पाने और तानों से जीवनसाथी के बीच बढ़ते चिड़चिड़ेपन ने रिश्तों की बुनियाद कमजोर कर दी है। रिश्तों का सॉफ्टवेयर ऐसा बिगड़ गया है कि दो साल के बाद ही नौबत तलाक तक पहुंच जा रही है। गाजियाबाद के परिवार न्यायालय में बीते एक साल में 1,462 दंपती ने अलग रहने की राह चुनी है। इसमें 976 ने आपसी सहमति से तलाक लिया। इनमें से 35 से 40 फीसदी मामले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर शिक्षक हैं, जिनके 15 से 20 फीसदी मामले हैं।
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