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आईआईटी मंडी।
– फोटो : संवाद
विस्तार
मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को प्रभावित करके दिमाग के कार्यों को अव्यवस्थित करने वाले रोग पार्किंसंस का इलाज संभव हो सकेगा। आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसे प्रोटीन का पता लगाया है जोकि रोग को फैलाने में जिम्मेदार है। पार्किंसंस में देखा जाने वाला प्रोटीन, अल्फा-सिन्यूक्लिन, का फॉस्फोराइलेशन न केवल पार्किंसंस रोग में, बल्कि सामान्य मस्तिष्क क्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
पूरे विश्व में पार्किंसंस रोग तेजी से बढ़ रहा है और विशेषज्ञों का यह अनुमान है कि अगले दो से तीन दशकों में भारत में इसके मामलों में 200-300 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि हो सकती है। दुनियाभर के शोधकर्ता इस बीमारी की जटिलताओं को सुलझाने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। वह इसके कारणों और विकास से लेकर इसके पैटर्न और परिणामों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। पार्किंसंस रोग से जुड़े एक खास प्रोटीन की प्रकृति को समझने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया है। यह प्रोटीन, जिसे अल्फा-सिन्यूक्लिन कहा जाता है। यह मनुष्य दिमाग में भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
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