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Holi 2024
– फोटो : अमर उजाला
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काशी में होली का उत्सव रंगभरी एकादशी से शुरू होता है। लेकिन, यहां के पुष्टि मार्ग परंपरा का निर्वहन करने वाले वैष्णवजन वसंत पंचमी से ही होली के उल्लास में डूब जाते हैं। ब्रज की परंपरा के अनुसार काशी में वैष्णवजन 40 दिनों तक होली मनाते हैं। खास ये कि इस उल्लास में पांच दिनों तक देवगण भी थिरकते हैं और इसका मुख्य केंद्र षष्ठपीठ गोपाल मंदिर है।
500 साल पहले स्थापित षष्ठपीठ गोपाल मंदिर में विराजमान ठाकुर जी यानी श्रीमुकुंद राय प्रभु और श्रीगोपाल लाल प्रभु प्रतिदिन अलग-अलग अनुष्ठान होते हैं। यहां की होली भी अलग होती है। वसंत पंचमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक होली का उल्लास छाया रहता है। 10-10 दिनों के चार चरण में होली का उत्सव मनाया जाता है। मंदिर के बड़े मुखिया नटवर शुक्ल ने बताया कि सभी परंपराएं ब्रज भाव से जुड़ी हैं। 40 दिनों तक अलग-अलग रूप में ठाकुर जी और वैष्णवजन होली खेलते हैं।
इस दौरान रंगभरी एकादशी से पूर्णिमा (होलिका दहन) यानी पांच दिनों तक होली के साथ नृत्य होता है। इसमें देवताओं के स्वरूप नृत्य करते हैं। पहले दिन गणेश जी संग रिद्धि-सिद्धि व चूहा, दूसरे दिन भगवान शिव-मां पार्वती के साथ नंदी व भैरव, तीसरे दिन इंद्रदेव और इंद्राणी, चौथे दिन विष्णुजी व ब्रह्माजी और अंतिम दिन भाड़ और भाड़िनी नृत्य करते हैं। मंदिर के षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी श्यामनोहर महाराज और युवराज प्रियेंदु बाबा सहित परिवार के अन्य सदस्य होली उत्सव के प्रतिदिन के अनुष्ठान पूरे कराते हैं। वैष्णवजन रोज अपने घरों में भी इस परंपरा को निभाते हैंं।
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