उत्तराखंड: राजभवन से अनुपूरक बजट के बिल को मंजूरी, अब क्षैतिज आरक्षण और धर्मांतरण के विधेयक पर नजर

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह (सेनि) ने 5440.43 करोड़ के प्रथम अनुपूरक बजट के लिए विधानसभा में पारित उत्तराखंड विनियोग (2022-23 का अनुपूरक) विधेयक को मंजूरी दे दी है। मंजूरी के बाद इस अधिनियम के तहत वित्त विभाग ने सभी विभागों को बजट जारी कर दिया है। इस संबंध में विभागों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान महिला क्षैतिज आरक्षण विधेयक समेत कुल 14 विधेयक विधानसभा से पारित कराए थे। ये सभी बिल राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजे गए। इनमें से अनुपूरक बजट से संबंधित विधेयक मंजूरी के बाद राजभवन से लौट गया। बजट में 3164 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च और 226.43 करोड़ रुपये राजस्व खर्च के लिए मंजूर हुए हैं। राज्य का मूल बजट 65571 करोड़ का है।

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सचिव राज्यपाल डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा के मुताबिक, अन्य विधेयकों पर न्यायिक परामर्श और परीक्षण का कार्य हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन बिलों को भी जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। सबकी निगाहें महिलाओं को क्षैतिज आरक्षण देने और जबरन धर्मांतरण रोकने वाले विधेयकों पर लगी हैं।

इन दोनों विधेयकों के कानून बनने के साथ ही राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार मिल जाएगा तो वहीं राज्य में जबरन और या प्रलोभन या किसी अन्य तरीके से धर्मांतरण करने पर कड़ी सजा होगी।

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राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह (सेनि) ने 5440.43 करोड़ के प्रथम अनुपूरक बजट के लिए विधानसभा में पारित उत्तराखंड विनियोग (2022-23 का अनुपूरक) विधेयक को मंजूरी दे दी है। मंजूरी के बाद इस अधिनियम के तहत वित्त विभाग ने सभी विभागों को बजट जारी कर दिया है। इस संबंध में विभागों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान महिला क्षैतिज आरक्षण विधेयक समेत कुल 14 विधेयक विधानसभा से पारित कराए थे। ये सभी बिल राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजे गए। इनमें से अनुपूरक बजट से संबंधित विधेयक मंजूरी के बाद राजभवन से लौट गया। बजट में 3164 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च और 226.43 करोड़ रुपये राजस्व खर्च के लिए मंजूर हुए हैं। राज्य का मूल बजट 65571 करोड़ का है।

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सचिव राज्यपाल डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा के मुताबिक, अन्य विधेयकों पर न्यायिक परामर्श और परीक्षण का कार्य हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन बिलों को भी जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। सबकी निगाहें महिलाओं को क्षैतिज आरक्षण देने और जबरन धर्मांतरण रोकने वाले विधेयकों पर लगी हैं।

इन दोनों विधेयकों के कानून बनने के साथ ही राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार मिल जाएगा तो वहीं राज्य में जबरन और या प्रलोभन या किसी अन्य तरीके से धर्मांतरण करने पर कड़ी सजा होगी।



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