हाईकोर्ट ने कहा : पानी भरा होने से कोई जमीन तालाब नहीं हो जाती, राजस्व दस्तावेज में तालाब दर्ज होना आवश्यक है

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land does not become a pond just because it is filled with water,

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : Amar ujala

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की जमीन को तालाब करार देने के मंडलायुक्त के आदेश को रद्द कर दिया है। कहा, मामले में हींचलाल तिवारी केस लागू नहीं होगा। क्योंकि, यह जमीन तालाब के रूप में दर्ज नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

अलीगढ़ के एटा चुंगी स्थित कमालपुर बाईपास पर चार अलग-अलग खसरा संख्या में 56 हजार गज जमीन है। राजस्व विभाग की खतौनी व खसरा में यह ट्रस्ट के नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। कई दशकों से इस भूखंड पर आसपास का पानी भरता आ रहा है। पिछले दिनों ट्रस्ट की ओर से इस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पानी को बाहर निकाला जा रहा था। नाला भी बन रहा था। लेकिन,प्रकरण में सीएम पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज हुई।

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