दिल्ली में अक्तूबर-नवंबर में वायु प्रदूषण खतरनाक श्रेणी में होने पर एलजी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से अक्तूबर में ही इस मामले में सरकारी आदेश जारी किया जाना चाहिए, लेकिन यह अभी भी लंबित हैं। इस स्थिति के लिए केजरीवाल सरकार और पर्यावरण मंत्री गोपाल राय की अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही को जिम्मेदार बताया जा रहा है।
मंत्री पर बगैर किसी वजह इस आशय का आदेश जारी करने से संबंधित फाइल को एक महीने तक दबाकर रखने का आरोप है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने उनके पास फाइल भेजी थी। इसे अब तक मंजूरी नहीं दी गई। इस लापरवाही के कारण नवंबर और दिसंबर में भी दिल्ली की हवा जहरीली श्रेणी में रही। सूत्रों का कहना है कि समय रहते अगर केजरीवाल सरकार की ओर से इस दिशा में उचित कदम उठाए जाते तो इस परिस्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता था। सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 04 एवं 06 नवंबर 2019 के आदेश और केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग (सीएक्यूएम) के इस साल पांच अगस्त के आदेश के मुताबिक मुख्य सचिव द्वारा विभागों और एजेंसियों को वायु-प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आदेश जारी किया जाना था। मुख्य सचिव ने इस आदेश को जारी करने की अनुमति लेने के लिए पर्यावरण मंत्री को फाइल भेजी।
अनुमति के बाद 22 अक्तूबर को फाइल एलजी को भेजी जानी थी, लेकिन पर्यावरण मंत्री ने बेवजह ही इस फाइल को अपने पास रखा और बगैर टिप्पणी के मुख्य सचिव को वापस भेज दिया। मंत्री द्वारा कोई निर्णय न लेने एवं फाइल वापस भेजने के बाद मुख्य सचिव ने इसे सीधे उपराज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा है, जिसे उपराज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। उपराज्यपाल ने इस मामले में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दिल्ली की जनता के प्रति कर्तव्यों की घोर लापरवाही पर अप्रसन्नता और निराशा व्यक्त की है। मुख्य सचिव को इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री को अवगत कराने के लिए भी कहा।
वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार गंभीर और सक्रिय मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आप ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के मामले में केजरीवाल सरकार गंभीर और पूरी तरह सक्रिय है। सर्दियों में वायु प्रदूषण ख़त्म करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से 15 सूत्री विंटर एक्शन प्लान जारी किया गया है। इसे दिल्ली की सभी एजेंसियां इसे सफलतापूर्वक लागू भी कर रही हैं। यही वजह है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार वायु प्रदूषण एक हद तक नियंत्रण में रहा है।
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दिल्ली में अक्तूबर-नवंबर में वायु प्रदूषण खतरनाक श्रेणी में होने पर एलजी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से अक्तूबर में ही इस मामले में सरकारी आदेश जारी किया जाना चाहिए, लेकिन यह अभी भी लंबित हैं। इस स्थिति के लिए केजरीवाल सरकार और पर्यावरण मंत्री गोपाल राय की अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही को जिम्मेदार बताया जा रहा है।
मंत्री पर बगैर किसी वजह इस आशय का आदेश जारी करने से संबंधित फाइल को एक महीने तक दबाकर रखने का आरोप है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने उनके पास फाइल भेजी थी। इसे अब तक मंजूरी नहीं दी गई। इस लापरवाही के कारण नवंबर और दिसंबर में भी दिल्ली की हवा जहरीली श्रेणी में रही। सूत्रों का कहना है कि समय रहते अगर केजरीवाल सरकार की ओर से इस दिशा में उचित कदम उठाए जाते तो इस परिस्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता था। सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 04 एवं 06 नवंबर 2019 के आदेश और केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग (सीएक्यूएम) के इस साल पांच अगस्त के आदेश के मुताबिक मुख्य सचिव द्वारा विभागों और एजेंसियों को वायु-प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आदेश जारी किया जाना था। मुख्य सचिव ने इस आदेश को जारी करने की अनुमति लेने के लिए पर्यावरण मंत्री को फाइल भेजी।