जम्मू कश्मीर: एलओसी पर बसे टीटवाल गांव में तैयार हुआ गुरुद्वारा, पाकिस्तान के चिलियाना तक गूंजेगी गुरबाणी

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एलओसी के पास बसे टीटवाल में बना गुरुद्वारा

एलओसी के पास बसे टीटवाल में बना गुरुद्वारा
– फोटो : संवाद

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उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में एलओसी के करीब बसे टीटवाल गांव में गुरुद्वारा साहिब का निर्माण कार्य पूरा हो गया। ‘सेव शारदा कमेटी’ के अध्यक्ष रविंदर पंडिता के नेतृत्व में स्थानीय निवासी एजाज खान की देखरेख में बने इस गुरुद्वारा साहिब को स्थानीय सिख समुदाय को सौंप दिया गया। जल्द ही एलओसी के पार पाकिस्तान के चिलियाना गांव के निवासी भी गुरबाणी और शबद कीर्तन की गूंज सुन पाएंगे। 

कमेटी के स्थानीय सदस्य एजाज खान ने कहा, 1947 से पहले यहां पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा हुआ करता था। 1947 के बाद हुए कबाइली हमले के दौरान कबाइलियों ने इस टीटवाल गांव को जला दिया था। हमने सोचा कि एक बार फिर से मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत का एक नया मजहब बनाते हैं। इसलिए हमने यह शुरुआत की और यह संदेश हम पूरे विश्व में देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हमने इन सभी धर्म स्थलों को दोबारा से बनाने की शुरुआत की, ताकि एक बार फिर से मंदिर से पूजा की, मस्जिद से अजान की और गुरुद्वारा साहिब से पाठ और शबद कीर्तन की आवाज फिर से गूंजे। एजाज खान ने यह भी कहा कि जिस जगह गुरुद्वारे का निर्माण हुआ है तब भी यहां ही गुरुद्वारा हुआ करता था।

उन्होंने बताया कि 2 दिसंबर, 2021 को इसके निर्माण का कार्य शुरू किया गया था और इसे पूरा कर दिया गया है। अब इसे स्थानीय सिख समुदाय के लोगों के हवाले कर दिया गया। इस बीच तंगधार निवासी और कमेटी के सदस्य जोगिन्दर सिंह ने बताया कि 11 दिसंबर, 2022 को हमने इसे टेकओवर किया।

उन्होंने कहा, सभी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साफ़-सफाई कर दी है। गुरु ग्रंथ साहिब के लिए पालकी साहिब भी ले आए हैं और जल्द ही आने वाले दिनों में यहां गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया जाएगा। इसके बाद रोजाना यहां पाठ और शबद कीर्तन किया जाएगा जिसकी गूंज एलओसी के पार चिलियाना गांव तक गूंजेगी।

जोगिन्दर सिंह ने बताया कि यह जमीन आज जहां गुरुद्वारा बन रहा है 19 साल तक इस पर अवैध कब्जा था, जिसे उन्होंने वापस लिया। जोगिन्दर सिंह ने बताया कि टीटवाल में सिखों का कोई घर नहीं है लेकिन यहां से करीब 7 किलोमीटर दूर त्रिबुनी गांव हैं जहां करीब 88 घर हैं और करीब 500 सिख समुदाय के लोगों की आबादी है।

उन्होंने यह भी कहा कि त्रिबुनी गांव का भी एक बड़ा इतिहास है। 1947 से पहले यहां करीब 300 से अधिक सिखों के घर थे और दो गुरुद्वारा साहिब थे। बाद में कबाइली हमले के दौरान सिख शहीद हो गए। जोगिन्दर सिंह ने बताया कि त्रिबुनी गांव में 150 सिख समुदाय के लोगों ने शहादत दी।

उन्होंने कहा कि हम में से कइयों ने अपने पिता तक को नहीं देखा। जोगिन्दर सिंह ने कहा कि बाद में सेना के सहयोग से त्रिबुनी में दोनों गुरुद्वारा साहिब का निर्माण किया गया।

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उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में एलओसी के करीब बसे टीटवाल गांव में गुरुद्वारा साहिब का निर्माण कार्य पूरा हो गया। ‘सेव शारदा कमेटी’ के अध्यक्ष रविंदर पंडिता के नेतृत्व में स्थानीय निवासी एजाज खान की देखरेख में बने इस गुरुद्वारा साहिब को स्थानीय सिख समुदाय को सौंप दिया गया। जल्द ही एलओसी के पार पाकिस्तान के चिलियाना गांव के निवासी भी गुरबाणी और शबद कीर्तन की गूंज सुन पाएंगे। 

कमेटी के स्थानीय सदस्य एजाज खान ने कहा, 1947 से पहले यहां पर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा हुआ करता था। 1947 के बाद हुए कबाइली हमले के दौरान कबाइलियों ने इस टीटवाल गांव को जला दिया था। हमने सोचा कि एक बार फिर से मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत का एक नया मजहब बनाते हैं। इसलिए हमने यह शुरुआत की और यह संदेश हम पूरे विश्व में देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हमने इन सभी धर्म स्थलों को दोबारा से बनाने की शुरुआत की, ताकि एक बार फिर से मंदिर से पूजा की, मस्जिद से अजान की और गुरुद्वारा साहिब से पाठ और शबद कीर्तन की आवाज फिर से गूंजे। एजाज खान ने यह भी कहा कि जिस जगह गुरुद्वारे का निर्माण हुआ है तब भी यहां ही गुरुद्वारा हुआ करता था।

उन्होंने बताया कि 2 दिसंबर, 2021 को इसके निर्माण का कार्य शुरू किया गया था और इसे पूरा कर दिया गया है। अब इसे स्थानीय सिख समुदाय के लोगों के हवाले कर दिया गया। इस बीच तंगधार निवासी और कमेटी के सदस्य जोगिन्दर सिंह ने बताया कि 11 दिसंबर, 2022 को हमने इसे टेकओवर किया।

उन्होंने कहा, सभी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साफ़-सफाई कर दी है। गुरु ग्रंथ साहिब के लिए पालकी साहिब भी ले आए हैं और जल्द ही आने वाले दिनों में यहां गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया जाएगा। इसके बाद रोजाना यहां पाठ और शबद कीर्तन किया जाएगा जिसकी गूंज एलओसी के पार चिलियाना गांव तक गूंजेगी।

जोगिन्दर सिंह ने बताया कि यह जमीन आज जहां गुरुद्वारा बन रहा है 19 साल तक इस पर अवैध कब्जा था, जिसे उन्होंने वापस लिया। जोगिन्दर सिंह ने बताया कि टीटवाल में सिखों का कोई घर नहीं है लेकिन यहां से करीब 7 किलोमीटर दूर त्रिबुनी गांव हैं जहां करीब 88 घर हैं और करीब 500 सिख समुदाय के लोगों की आबादी है।

उन्होंने यह भी कहा कि त्रिबुनी गांव का भी एक बड़ा इतिहास है। 1947 से पहले यहां करीब 300 से अधिक सिखों के घर थे और दो गुरुद्वारा साहिब थे। बाद में कबाइली हमले के दौरान सिख शहीद हो गए। जोगिन्दर सिंह ने बताया कि त्रिबुनी गांव में 150 सिख समुदाय के लोगों ने शहादत दी।

उन्होंने कहा कि हम में से कइयों ने अपने पिता तक को नहीं देखा। जोगिन्दर सिंह ने कहा कि बाद में सेना के सहयोग से त्रिबुनी में दोनों गुरुद्वारा साहिब का निर्माण किया गया।



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