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अमरोहा में बैठक लेते एसपी
– फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल के निरीक्षण के दौरान हुए विवाद के डेढ़ महीने बाद प्रशासनिक महिला अधिकारी ने मिश्रा अस्पताल के संचालक के बेटे व डॉक्टर सारस्वत मिश्रा के खिलाफ छेड़खानी और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद भी कई दिन तक विवाद चलता रहा था।
डीएम के आदेश पर बीएसए मोनिका सिंह और सीओ अंजलि कटारिया ने मामले की जांच की थी। इस दौरान मेडिकल पर लगे सीसीटीवी फुटेज में छेड़खानी के कोई साक्ष्य नहीं मिले थे। एक फरवरी की शाम करीब पांच बजे एक प्रशासनिक महिला अधिकारी अपने अनुसेवक के साथ नगर कोतवाली क्षेत्र में स्थित मिश्रा अस्पताल के मेडिकल पर जांच करने पहुंची थीं।
यहां दवाइयां की जांच शुरू की तो मेडिकल पर मौजूद कर्मचारियों के होश उड़ गए। उन्होंने यह बात अस्पताल पर मौजूद डॉक्टर सारस्वत मिश्रा से बताई। महिला अधिकारी को कोई भी पहचानता नहीं था, इसलिए अस्पताल के डॉक्टर सारस्वत मिश्रा ने दवा चेक करने के बारे में पूछा। इसके बाद कहासुनी हो गई।
महिला अधिकरी ने डॉक्टर सारस्वत मिश्रा पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और छेड़खानी करने का आरोप लगाकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही टीपी नगर चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई और जांच पड़ताल की। महिला अधिकारी ने नगर कोतवाली पहुंच गई थीं और अस्पताल के डॉक्टर सारस्वत मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करने लगी थीं।
करीब तीन घंटे तक महिला अधिकारी कोतवाली में बैठी रहीं थीं। मामला संज्ञान में आते ही एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने सीओ अंजलि कटारिया को मामले की जांच सौंपी। डीएम राजेश कुमार त्यागी ने प्रशासन की ओर से मामले की जांच बीएसए मोनिका सिंह को सौंपी थी।
सीओ सिटी अरुण कुमार ने बताया कि मामले में सारस्वत मिश्रा के खिलाफ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और छेड़खानी के आरोप के मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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